वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल (America and Israel) की ओर से ईरान पर किए गए बड़े हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रणनीति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप ((Donald Trump) ) ने इस सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की जनता को “आजादी” दिलाना बताया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जमीनी सेना के ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना बेहद मुश्किल होगा।
रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और नागरिकों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा कि जब सैन्य अभियान पूरा हो जाएगा, तब वे खुद अपनी सरकार पर कब्जा कर सकते हैं। हालांकि कई विशेषज्ञ इस रणनीति पर संदेह जता रहे हैं।
अमेरिका के थिंक टैंक Stimson Center की विशेषज्ञ Kelly Grieco का कहना है कि जमीनी सेना के बिना इतना बड़ा राजनीतिक बदलाव संभव नहीं दिखता। वहीं Center for International Policy के विश्लेषक Matthew Duss ने कहा कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब केवल हवाई हमलों के जरिए किसी देश में सत्ता परिवर्तन हो गया हो।
उन्होंने Libya Civil War 2011 का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय नाटो के हवाई हमलों के बावजूद Muammar Gaddafi को हटाने के लिए जमीनी स्तर पर विद्रोहियों की लड़ाई जरूरी हुई थी।
हालिया सर्वे के अनुसार इस युद्ध को लेकर अमेरिका में समर्थन काफी कम दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 25% अमेरिकी नागरिक ही इस सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं, जबकि Iraq War 2003 की शुरुआत में करीब 55% लोगों का समर्थन था।
डेमोक्रेटिक सीनेटर Richard Blumenthal ने भी चिंता जताई है कि हालात ऐसे बन रहे हैं, जिससे अमेरिका को ईरान में जमीनी सेना भेजनी पड़ सकती है, जो अमेरिकी सैनिकों के लिए बड़ा खतरा साबित होगा।
रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे जमीनी युद्ध से अलग है। ट्रंप की योजना है कि हवाई और नौसैनिक हमलों के जरिए ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल क्षमता और परमाणु ठिकानों को इतना नुकसान पहुंचाया जाए कि उसकी पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ जाए।
ट्रंप लंबे समय से अमेरिका को दूसरे देशों के “अंतहीन युद्धों” से दूर रखने की बात करते रहे हैं। उनका मानना है कि किसी देश में जमीनी सेना भेजने का मतलब भारी आर्थिक खर्च और अमेरिकी सैनिकों की जान का जोखिम है। इसी वजह से वे ईरानी जनता से खुद सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील कर रहे हैं।
इस युद्ध को लेकर अमेरिकी नेताओं के बीच भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अभियान का लक्ष्य ईरान के परमाणु और ड्रोन कार्यक्रम को खत्म करना है। वहीं रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा।
दूसरी ओर डेमोक्रेटिक सीनेटर Elizabeth Warren ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास ईरान को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष अब सीमित सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़कर लंबा और जटिल रूप ले सकता है।
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