
नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट (Middle East) के बदलते हालात में चीन (China) और ईरान (Iran) के रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में यह सहयोग सिर्फ आर्थिक या कूटनीतिक ही नहीं बल्कि सैन्य क्षेत्र में भी बढ़ता दिखाई दे रहा है. अमेरिका, इजरायल और उसके सहयोगियों के बढ़ते दबाव के बीच चीन कई स्तरों पर ईरान की सैन्य क्षमता को अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से समर्थन करता रहा है.
सबसे पहले बात सैन्य तकनीक और उपकरणों की करते हैं. चीन वर्षों से ईरान को रक्षा तकनीक, मिसाइल से जुड़ी प्रणालियां और ड्रोन तकनीक विकसित करने में मदद करता रहा है. यह सहयोग ईरान को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद करता है.
ईरान की मदद का चीन को भी फायदा
इसका फायदा चीन को भी हुआ है. चीन ने इन हथियारों को विकसित करने में मदद की और ईरान ने इनका इस्तेमाल अमेरिका और इजरायल के खिलाफ किया, जिससे इनकी वॉर जोन में काबिलियत और कमियों का भी पता चला.
इसके अलावा दूसरा बड़ा क्षेत्र संयुक्त सैन्य अभ्यास का है. हाल के वर्षों में ईरान ने चीन और रूस के साथ कई संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किए हैं. इन अभ्यासों के जरिए ईरान को आधुनिक युद्ध रणनीतियों और तकनीकी समन्वय का अनुभव मिलता है.
खासकर हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी में होने वाले ये अभ्यास अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक स्पष्ट संदेश भी देते हैं कि ईरान अकेला नहीं है.
तीसरा पहलू रक्षा उद्योग और सैन्य प्रशिक्षण का है. जानकारी के मुताबिक जून 2025 में 12 दिनों के संघर्ष के बाद चीन ने ईरान को रडार सिस्टम, साइबर सुरक्षा, और नौसेना से जुड़ी तकनीकों को बड़े तौर पर दिया.
इसके अलावा चीन ने ईरान को अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकसित करने में तकनीकी सहयोग दिया है. ईरान के कुछ रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट और अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम के विकास में चीनी तकनीकी अनुभव का प्रभाव रहा है.
इन सैटेलाइट्स की मदद से ईरान को सीमा क्षेत्रों, समुद्री मार्गों और सैन्य गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखने की क्षमता मिलती है. जिसका प्रमाण हाल ही के संघर्ष में अमेरिका और इजरायल ने महसूस भी किया है.
इसके अलावा सैटेलाइट डेटा और इमेजरी भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. चीन के पास आधुनिक रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नेटवर्क है, जो हाई डेफिनेशन वाली तस्वीरें और डेटा दे सकता है. जिसकी मदद से ईरान ने मिडल ईस्ट में अमेरिका के कई बड़े बेस, कमांड और कंट्रोल सेंटर पर हमले किए.
वहीं कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी चीन का सहयोग अहम माना जाता है. चीन की कंपनियां सुरक्षित फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क, 5G तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में ईरान के साथ काम कर रही हैं. इससे ईरान का संचार नेटवर्क अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक बन रहा है.
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