
चंडीगढ़। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) की चंडीगढ़ ब्रांच (Chandigarh Branch) में हुए 590 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां (Fake Companies) बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया। सरकारी विभागों के खातों से इसे इन फर्जी कंपनियों के खातों में अनधिकृत रूप से भेजा जाता था। इन कंपनियों में आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिंटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुज प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजैक्ट शामिल हैं।
विजिलेंस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एडीजीपी चारू बाली ने ये खुलासे किए। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में 8 विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है, जिनमें से 10 खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक सैक्टर-32 चंडीगढ़ और 2 खाते एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक में संचालित थे। इस मामले में कई जगह छापेमारी की गई है। कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है।
आरोपियों में बैंक और सरकारी कर्मचारी शामिल
अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और एक सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि एक आरोपी पुलिस रिमांड पर है। जांच के दौरान अब तक 16 स्थानों पर गहन छापेमारी की गई है। इस मामले में कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है। इस दौरान संपत्तियों की खरीद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच साइबर फॉरेंसिक लैब की सहायता से की जा रही है। इसके अतिरिक्त 3 फॉर्च्यूनर, 2 इनोवा और 1 मर्सिडीज सहित 6 वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें अपराध की आय से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है।
जांच एजेंसी द्वारा अब तक 100 से अधिक बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगाने के लिए अनुरोध भेजे गए हैं। अभी तक 8 सरकारी विभागों में अनधिकृत लेन-देन सामने आया है उनकी पहचान की जा चुकी है। पिछले एक साल के लेखा जोखा की गहनता से जांच की जा रही है जो कि अंतिम चरण में है। अभी तक की जांच में कई सरकारी अधिकारी/ कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों की संलिप्तता की भी पहचान की गई है। पुष्टि होने उपरांत विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 10 संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन्हें अपराध से अर्जित धन से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है।
फर्जी डेबिट मेमो और नकली बैंक स्टेटमैंट से ट्रांजेक्शन
बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डेबिट मेमो तैयार कर या बिना किसी वैध डेबिट मेमो/चेक के ही धनराशि ट्रांसफर की गई। फर्जी बैंक स्टेटमैंट भी तैयार किए गए ताकि खातों से धन उन विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जा सके जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आरोपियों या उनके परिजनों से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी द्वारा बैंकों और संबंधित विभागों से बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है और उसका गहन विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकृत और अनधिकृत लेन-देन की पहचान की जा रही है, ताकि पूरे फंड फ्लो का पता लगाया जा सके।
जांच में ईडी की भी एंट्री
590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो चुकी है। बुधवार को ईडी की चंडीगढ़ जोन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की। ईडी की टीम ने 19 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। ईडी के अनुसार इस मामले में कई बिजनेस संस्थाओं, पूर्व बैंक अधिकारियों, घोटाले से लाभ पाने वाले लोगों और कुछ रियल एस्टेट एजेंटों के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है। जांच में चंडीगढ़ के एक होटल और रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा का नाम भी सामने आया है। घोटाले की खबर सामने आने के बाद से वह फरार है। ईडी की टीम फिलहाल दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है।
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