नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (J&K) के बडगाम और लद्दाख के लेह में आज यौम-ए-कुद्स (Youm-e-Quds) के अवसर पर हजारों लोगों ने बड़ी संख्या में जुटकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों का विरोध (Opposition to US and Israeli policies) करते हुए क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताई।
बडगाम में बड़ी संख्या में लोग मार्कजी इमामबाड़ा में इकट्ठा हुए, जहां से उन्होंने मुख्य चौक तक शांतिपूर्ण रैली निकाली। इसी तरह लेह में भी हजारों लोगों ने विरोध मार्च में हिस्सा लिया और हालिया घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में उनकी मौत हुई, जिसकी उन्होंने कड़ी निंदा की।
रैली में शामिल लोगों ने कहा कि यह प्रदर्शन फिलिस्तीन और ईरान के लोगों के प्रति एकजुटता दिखाने और इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों का विरोध दर्ज कराने के लिए आयोजित किया गया है।
Yawm‑e‑Quds एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जिसे फिलिस्तीन के लोगों के समर्थन और इजरायली कब्जे के विरोध के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के पहले सर्वोच्च नेता Ruhollah Khomeini ने की थी।
यह दिन आमतौर पर जुमे की नमाज के बाद रैलियों और प्रदर्शनों के साथ मनाया जाता है और पूर्वी यरुशलम पर इजरायली कब्जे के विरोध का प्रतीक माना जाता है।
भारत में भी इस मौके पर कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। Lucknow के बारा इमामबाड़ा में जुमे की नमाज के बाद लोगों ने रैली निकाली। यहां शिया धर्मगुरु Kalbe Jawad Naqvi ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान पर हमला निंदनीय है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
ये प्रदर्शन ऐसे समय हुए हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बाद ईरान ने जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।
बडगाम और लेह में हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से यह साफ हुआ कि फिलिस्तीन और ईरान के मुद्दे पर दुनिया के कई हिस्सों में लोग अपनी भावनाएं और समर्थन खुलकर जाहिर कर रहे हैं।
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