इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के भीतर बढ़ती गुटबाजी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। Inter-Services Intelligence के लिए भी यह घटनाक्रम चुनौती माना जा रहा है। हाल ही में लश्कर ए तायबा (Lashkar-e-Taiba) के गढ़ Muridke में कमांडर Bilal Arif Salafi की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया गया कि वह ईद की नमाज के बाद मरकज से बाहर निकल रहा था, तभी उस पर हमला हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले से घात लगाए बैठे Ghazi Ubaidullah Khan ने सलाफी पर गोलियां चलाईं, जबकि हमले में शामिल एक महिला ने चाकू से वार किए। हमले में सलाफी की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पुरानी दुश्मनी थी, जिसमें उबैदुल्लाह के दामाद की हत्या का विवाद भी शामिल था।
सलाफी की हत्या के बाद संगठन के कई वरिष्ठ कमांडरों ने सुरक्षा बढ़ा दी है। आतंकी अब खुले तौर पर सामने आने से बच रहे हैं और कई भूमिगत हो गए हैं। इससे संगठन के भीतर अविश्वास और बढ़ गया है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
पिछले कुछ वर्षों में आतंकी संगठनों के भीतर आपसी संघर्ष के कई मामले सामने आए हैं। मई में सिंध में कथित मास्टरमाइंड Saifullah Khalid की हत्या हुई थी। इससे पहले Abu Qatal और Rahimullah Tariq जैसे नाम भी आपसी रंजिश में मारे जा चुके हैं।
संरक्षण का दावा
सूत्रों के मुताबिक सलाफी को Zaki-ur-Rehman Lakhvi का संरक्षण प्राप्त था और वह संगठन के वित्तीय नेटवर्क से जुड़ा अहम व्यक्ति माना जाता था। बताया जाता है कि वह Sheikhupura क्षेत्र से चंदा जुटाने में सक्रिय था, जिससे संगठन में उसका प्रभाव बना हुआ था।
विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना आतंकी संगठनों के भीतर बढ़ते अविश्वास और नेतृत्व संघर्ष का संकेत है, जिससे उनके नेटवर्क पर असर पड़ सकता है।
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