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भारत दौरे पर आने वाले हैं चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग…. यात्रा से पहले सीमा पर बढ़ी हलचल

August 14, 2026

बीजिंग। ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) की भारत यात्रा प्रस्तावित (India Visit proposed) है। इससे ठीक पहले अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव की खबरें सामने आई हैं। शीर्ष स्तर की वार्ताओं से पहले सीमाई इलाकों में तनाव का बढ़ना आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि चीन की कूटनीति का एक सोचा-समझा पैटर्न रहा है।

अक्सर भारत और चीन के बीच शीर्ष स्तरीय वार्ता तय होने पर चीन सीमा पर आक्रामकता दिखाकर अपना पलड़ा भारी करने की कोशिश करता है। दबाव आधारित कूटनीति चीन की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा रही है। वार्ता की मेज पर बैठने से पहले जमीन पर यथास्थिति बदलकर या तनाव पैदा कर चीन अपनी शर्तों पर मोलभाव की स्थिति मजबूत करना चाहता है। चीन के लिए राजनयिक स्तर पर शांति की बात करना व सैन्य मोर्चे पर तनाव बढ़ाना अपने प्रतिद्वंद्वी को रक्षात्मक बनाने की रणनीति का हिस्सा है।


  • अमेरिका से तनाव का फायदा
    अरुणाचल के ताक्सिंग में हुआ सैन्य तनाव का ताल्लुक कहीं न कहीं भारत और अमेरिका संबंधों में कई मुद्दों पर आए खिंचाव से भी है। बीजिंग अपने लिए इसे एक अवसर के तौर पर देख रहा है। बीजिंग अक्सर भारत के वैश्विक गठबंधनों पर नजर रखता है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों में आने वाले उतार-चढ़ाव या दबाव के क्षणों का फायदा उठाकर चीन हिमालयी सीमा पर आक्रामक रुख अपनाता है, ताकि भारत पर दोहरे मोर्चे का रणनीतिक दबाव बनाया जा सके।

    पहले भी शी की यात्रा से पहले हुआ तनाव
    दोकलम 2017
    खरीब नौ 2017 में दोकलम में भारत और चीन की सेनाएं करीब 73 दिनों तक आमने-सामने रहीं। अगस्त में गतिरोध खत्म हुआ और इसके कुछ ही सप्ताह बाद सितंबर में चीन में ब्रिक्स सम्मेलन हुआ, जहां मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। सीमा पर तनाव के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद जारी रहा।

    गलवां 2020:
    साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की गतिविधियों के बाद गलवां में हिंसक झड़प हुई। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत चली। 2024 में देपसांग और डेमचोक में पेट्रोलिंग को लेकर समझौते के बाद ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी व शी की मुलाकात हुई।

    तवांग 2022
    दिसंबर 2022 में तवांग सेक्टर में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक चैनलों से हुई बातचीत के बाद शांति स्थापित हुई। ऐसे में ताक्सिंग में मौजूदा हलचल को भी इसी कूटनीतिक पैटर्न के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।

    ड्रैगन से रार के बीच बढ़ता कारोबार, नए बाजार खोलने की तैयारी में भारत-चीन
    अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावों के बीच व्यापारिक रिश्तों में नए बदलाव दिखाई दे रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले महीने ब्रिक्स सम्मेलन में भारत आने की संभावना है। इस दौरान द्विपक्षीय वार्ता में भारतीय फार्मा, कृषि और अन्य उत्पादों के लिए चीन के बाजार में अधिक पहुंच का मुद्दा उठ सकता है। भारत चीन से स्मार्टफोन के कल-पुर्जे, सेमीकंडक्टर, लिथियम-आयन बैटरी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केबल, प्लास्टिक और पॉलिमर जैसे उत्पाद आयात करता है। वहीं भारत से चीन को लौह अयस्क, पेट्रोलियम उत्पाद, ऑर्गेनिक रसायन, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद, धातु और रत्न-जवाहरात निर्यात किए जाते हैं।

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