
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुई जंग के छह महीने हो चुके हैं। एक अंतरिम समझौते और कई दौर की बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच जंग कब खत्म होगी, को लेकर जारी कयासों के बीच ईरान (Iran) के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) (Islamic Revolutionary Guard Corps – IRGC) के शीर्ष जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने कहा कि तेहरान युद्ध को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का कार्यकाल खत्म होने तक यानी 20 जनवरी, 2029 तक खींच सकता है। नकदी के इस बयान को ट्रंप की कीमत चुकानी होगी धमकी का जवाब माना जा रहा है।
नकदी ने एक साक्षात्कार में कहा कि हमें ऐसी स्थिति बनानी होगी जिससे दुश्मन हम पर हमला करने की हिम्मत न करे और हम सुरक्षित रह सकें। एक तरीका यह है कि इस युद्ध को तब तक खींचा जाए जब तक कि राष्ट्रपति का अगला कार्यकाल शुरू न हो जाए और दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया जाए।
ईरान में जंग के बीच गाजा में शांति के प्रयास, ट्रंप के दामाद दौरा करेंगे
इसी बीच गाजा में संघर्ष समाप्त करने की योजनाओं पर भी काम जारी है। योजनाओं आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुश्नर अगले हफ्ते पश्चिम एशिया जाएंगे। ट्रंप प्रशासन द्वारा हाल ही में घोषित एक समझौता इस्राइली विरोध के कारण अटक गया है। बोर्ड ऑफ पीस के एक अधिकारी ने बताया कि कुश्नर, बोर्ड उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लाडेनोव और कार्यकारी बोर्ड सदस्य टोनी ब्लेयर रविवार को इस्राइल पहुंचेंगे। यह समूह फिर काहिरा जाएगा, जहां गाजा का नियंत्रण संभालने वाले फलस्तीनी समूह की बैठकें चल रही हैं। अधिकारी ने कहा कि इन बैठकों से ट्रंप और बोर्ड ऑफ पीस का गाजा में शांति लाने का संकल्प दिखेगा। इस्राइल ने ट्रंप द्वारा घोषित हालिया समझौते को खारिज कर दिया है। इस समझौते में हमास को निरस्त्र करना और इस्राइल को फलस्तीनी क्षेत्र से सेना हटाना शामिल था। हालांकि हमास ने हथियार छोड़ने की योजना स्वीकार की, पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र न हो जाए। यह समझौता गाजा युद्ध समाप्त करने में एक संभावित सफलता माना गया था। यह अक्तूबर के एक युद्धविराम पर आधारित था, जिससे बंधकों की रिहाई हुई थी।
ईरान के साथ जंग में अमेरिका ने गंवाए 45 रीपर ड्रोन, 1.3 अरब डॉलर का नुकसान
पांच माह से अधिक समय से जारी जंग में कितना नुकसान हुआ है, इस विषय पर कई रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे सामने आ चुके हैं। द वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में कम से कम 45 MQ-9 रीपर निगरानी और स्ट्राइक ड्रोन खो दिए। यह अमेरिकी सैन्य बेड़े का करीब 25 फीसदी हिस्सा है, जिससे करदाताओं को 1.3 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि सभी ड्रोन मार गिराए नहीं गए, कुछ संचार लिंक फेल होने से दुर्घटनाग्रस्त हुए।
भारत को 2029 में मिलने शुरू होंगे MQ-9 रीपर ड्रोन
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि भारत ने 2024 में अमेरिका से 31 MQ-9 रीपर ड्रोन खरीदने का समझौता किया है, जिनकी डिलीवरी 2029 में शुरू होगी। अमेरिका ने 2007 में इस ड्रोन को सेना में शामिल किया था। पश्चिम एशिया और अन्य संघर्ष वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संघर्ष से पहले अमेरिकी सैन्य बेड़े में लगभग 185 रीपर थे। मई में, लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबोर ने सीनेट को बताया कि शेष ड्रोन की संख्या करीब 135 रह गई है। उन्होंने नुकसान पर चिंता जताई और बेड़े को तेजी से भरने की जरूरत भी बताई।
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