
तेहरान। अमेरिकी अधिकारी (American Officer) बता रहे हैं कि ईरान (Iran) के लगातार हमलों के चलते अमेरिका की जमीन पर मौजूद सेना का बड़ा हिस्सा अब दूरदराज से ही युद्ध कर रहा है। हालांकि, लड़ाकू पायलट और कुछ क्रू अभी भी सैन्य ठिकानों पर जमे हुए हैं और ईरान पर बमबारी कर रहे हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने नागरिकों से अमेरिकी सैनिकों (American soldiers) की नई लोकेशन की जानकारी देने की अपील की है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि अब तक ईरान के 7,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं। हालांकि सैनिकों को अस्थायी ठिकानों पर भेजना पेंटागन की तैयारियों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
शुरुआत में 40 हजार सैनिक, अब कई यूरोप और अन्य जगहों पर
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, युद्ध शुरू होने पर क्षेत्र में करीब 40 हजार सैनिक तैनात थे। इनमें से कई को अन्य स्थानों पर भेज दिया गया है, कुछ को यूरोप तक स्थानांतरित किया गया है, जबकि कई सैनिक पश्चिम एशिया में हैं लेकिन अपने मूल ठिकानों पर नहीं।
ईरानी जवाब और व्यापक प्रभाव
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता और दर्जनों अन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद भी अमेरिका और इज़राइल के हमलों का जबरदस्त जवाब दिया। इसके तहत अमेरिकी ठिकानों, दूतावासों और तेल-गैस बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को काफी हद तक बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हुई।
अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान
अमेरिकी सैनिकों के 13 प्रमुख ठिकानों में से कई अब रहने योग्य नहीं रहे। कुवैत स्थित ठिकानों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। पोर्ट शुएबा पर हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए और एक टैक्टिकल ऑपरेशंस सेंटर तबाह हो गया। अली अल सलेम एयर बेस, अल उदीद एयर बेस और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी ड्रोन और मिसाइलों ने विमानों, संचार उपकरणों और रीफ्यूलिंग टैंकरों को नुकसान पहुंचाया।
पेंटागन ने माना, ईरान में बची है क्षमता
पेंटागन के ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्वीकार किया कि भारी हवाई हमलों के बावजूद ईरान के पास अब भी हमला करने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की कई परतें अमेरिकी सैनिकों और हितों की रक्षा कर रही हैं, लेकिन इसे और मजबूत करने की जरूरत है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर योजना की कमी रही। ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ताकत का गलत आंकलन किया और युद्ध शुरू होने से पहले क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी दूतावासों और अन्य ठिकानों पर कर्मचारियों की संख्या नहीं घटाई। सैनिकों को अन्य स्थानों पर भेजने से युद्ध संचालन और कठिन हो गया है। वायुसेना के पूर्व विशेष ऑपरेशंस विशेषज्ञ जे ब्रायंट ने कहा, “हमारे पास ऑपरेशन सेंटर जल्दी स्थापित करने की क्षमता है, लेकिन सारे उपकरण होटल की छत पर रखने जैसा काम चुनौतीपूर्ण है।”
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