नई दिल्ली। नासा के आर्टेमिस‑2 मिशन (NASA Artemis II Mission) ने 7 अप्रैल को इतिहास रचते हुए लगभग 50 साल बाद मानव को फिर से चंद्रमा (Moon) के करीब पहुंचाया। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री— रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कॉश और जेरेमी हैनसेन – शामिल हैं। भारतीय समयानुसार तड़के 12:15 बजे अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा की।
यह मिशन इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि इसके तहत पहली बार इंसान चंद्रमा के उस हिस्से को करीब से देख रहा है, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। इस उड़ान के लिए ओरियन स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया, जिसे गहरे अंतरिक्ष में भेजा गया।
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरे। उन्होंने चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाया, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “लूनर फ्लायबाय” कहा जाता है। इस प्रक्रिया में अंतरिक्ष यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग कर पृथ्वी की ओर लौटता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यदि इंजन में खराबी भी आ जाए, तो चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की दिशा में मोड़ सकता है। इसी कारण इस मिशन को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है।
मिशन से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार चंद्रमा का दूर वाला हिस्सा सपाट नहीं है, बल्कि वहां कई गड्ढे मौजूद हैं। इससे चंद्रमा की संरचना को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं।
यात्रा के दौरान चंद्रमा के पीछे पहुंचने पर रेडियो सिग्नल ब्लॉक हो गए, जिससे करीब 40 मिनट तक कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। बाद में सिग्नल बहाल होने पर मिशन सामान्य रूप से जारी रहा।
यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव को उतारने की योजना की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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