
डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में बहस तेज होती जा रही है. अब एंथ्रोपिक के को-फाउंडर क्रिस ओलाह ने चेतावनी दी है कि AI का भविष्य सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों के हाथ में नहीं होना चाहिए. यहां बिग टेक का मतलब एपल, अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों से है. वेटिकन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकारों, धार्मिक नेताओं और आम लोगों को भी एआई से जुड़े फैसलों में शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी माना कि एआई आने वाले समय में बड़े स्तर पर लोगों की नौकरियां प्रभावित कर सकता है. एआई को लेकर उनकी यह चेतावनी दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई है.
क्रिस ओलाह ने वेटिकन में पोप लियो XIV की पहली एनसाइक्लिकल पेश किए जाने के दौरान एआई को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां भले ही नई टेक्नोलॉजी बना रही हों, लेकिन उन पर भी बिजनेस, प्रतियोगिता और वैश्विक राजनीति का दबाव रहता है. उनके मुताबिक एआई की रेस में आगे निकलने की होड़ कई बार सही फैसलों को कमजोर कर सकती है. ओलाह ने साफ कहा कि सिर्फ कंपनियों के भरोसे एआई को कंट्रोल नहीं छोड़ा जा सकता. उनका मानना है कि एआई डेवलपमेंट में सरकारों, विशेषज्ञों, धार्मिक संस्थाओं और जनता की भागीदारी जरूरी है ताकि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इंसानियत के हित में हो सके.
क्रिस ओलाह ने अपने भाषण में कहा कि आने वाले समय में एआई इंसानी काम को बड़े स्तर पर बदल सकता है. उनके मुताबिक यह सिर्फ छोटी समस्या नहीं बल्कि इतिहास के सबसे बड़े सामाजिक बदलावों में से एक हो सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एआई की वजह से लाखों लोग बेरोजगार होते हैं तो उन लोगों की मदद करना पूरी दुनिया की नैतिक जिम्मेदारी होगी. ओलाह ने यह भी कहा कि अभी दुनिया के पास ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं है जो एआई से होने वाले फायदे को बराबरी से बांट सके. उनका कहना था कि एआई डेवलपमेंट कुछ अमीर देशों तक सीमित है और गरीब देशों तक इसका फायदा पहुंचाने का कोई ठोस तरीका अभी मौजूद नहीं है.
वेटिकन में हुए इस कार्यक्रम में पोप लियो XIV ने भी एआई को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की. उन्होंने अपनी पहली बड़ी शिक्षण डॉक्यूमेंट “Magnifica Humanitas” में कहा कि दुनिया एआई सिस्टम को बहुत तेजी से अपना रही है, लेकिन इंसानी असर पर पर्याप्त सोच नहीं हो रही. पोप ने सरकारों से एआई सिस्टम पर सख्त इंसानी निगरानी रखने की अपील की. वहीं क्रिस ओलाह ने कहा कि आज के एडवांस एआई मॉडल इतने जटिल हो चुके हैं कि रिसर्चर्स भी उनके व्यवहार को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे. कई बार एआई का व्यवहार इंसानी सोच जैसा दिखाई देने लगा है, जिससे नए खतरे और सवाल पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि एआई का भविष्य सिर्फ कॉरपोरेट फायदे से नहीं बल्कि नैतिक सोच और जिम्मेदारी के साथ तय होना चाहिए.
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