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UP वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव: भाजपा वर्चस्व वाले शहरों में ज्यादा कटे वोट, मुस्लिम बहुल इलाकों में कम असर

April 11, 2026

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट (Voter List) ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। करीब दो करोड़ नाम कटने के बाद राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि जहां भाजपा (BJP) मजबूत मानी जाती है, उन बड़े शहरों में वोटों में ज्यादा कमी आई है, जबकि मुस्लिम बहुल इलाकों में अपेक्षाकृत कम कटौती दर्ज की गई है।

कहां किसके वोट कटे, तस्वीर अब भी साफ नहीं
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुल वोट भले ही कम हुए हों, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस दल को इसका फायदा या नुकसान होगा। साथ ही यह भी तय नहीं है कि नए वोट जोड़ने में सत्ता पक्ष आगे रहा या विपक्ष। ऐसे में 2027 के चुनाव को देखते हुए सभी दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी होगी। खासकर वे 49 सीटें, जहां पिछली बार जीत का अंतर 5 हजार से कम था, अब और ज्यादा अहम हो गई हैं।

मुस्लिम बहुल जिलों में सीमित असर
आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम बहुल जिलों में वोट कटने का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा है। सहारनपुर में 10.48%, मुजफ्फरनगर में 10.38%, शामली में 10.93%, मुरादाबाद में 10%, अमरोहा में 8.92%, आजमगढ़ में 9.46%, मऊ में 11.53% और गाजीपुर में 10.89% वोट कम हुए हैं। इन इलाकों में 2022 चुनाव के दौरान ध्रुवीकरण देखने को मिला था, ऐसे में 2027 में यहां के परिणामों पर सबकी नजर रहेगी।


  • बड़े शहरों में भारी कटौती से बदले समीकरण
    इसके उलट, भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले शहरों में वोटों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। लखनऊ में 22.89%, गौतमबुद्धनगर में 19.33%, कानपुर नगर में 19.42%, अलीगढ़ में 13.81%, मेरठ में 18.75% और गाजियाबाद में करीब 20% वोट कम हुए हैं। आगरा और शाहजहांपुर में भी 17% से ज्यादा कटौती हुई है। इन शहरों में पिछले चुनाव में भाजपा का दबदबा रहा था, ऐसे में बदले आंकड़े आगामी चुनाव में मुकाबले को दिलचस्प बना सकते हैं।

    करीबी मुकाबले वाली सीटों पर बढ़ी चिंता
    प्रदेश की कई वीआईपी सीटों पर वोट कटौती ने समीकरण बिगाड़ दिए हैं। प्रयागराज में करीब 8.26 लाख वोट कम हुए, जिसमें इलाहाबाद दक्षिण सीट पर ही 99 हजार से ज्यादा वोट घटे। यहां पिछली बार जीत का अंतर 26 हजार के आसपास था।

    प्रतापगढ़ की कुंडा सीट पर, जहां राजा भैया 30 हजार से अधिक वोटों से जीते थे, अब 53 हजार से ज्यादा वोट कम हो गए हैं। देवरिया की पथरदेवा सीट पर भी लगभग 28 हजार वोट घटे हैं, जबकि पिछली जीत का अंतर भी लगभग इतना ही था। ऐसे में इन सीटों पर मुकाबला और कड़ा होने के संकेत हैं।

    विशेषज्ञों की राय
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तय करना मुश्किल है कि कटे हुए वोट किस दल के ज्यादा हैं। पूर्व आईजी और विश्लेषक अरुण कुमार गुप्ता के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम हटे हैं, उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है जो स्थान बदल चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके दस्तावेज पूरे नहीं थे। उन्होंने कहा कि 2003 के बाद इतने बड़े स्तर पर पुनरीक्षण हुआ है, इसलिए संख्या में गिरावट स्वाभाविक मानी जा सकती है।

    2027 के चुनाव से पहले नई रणनीति की जरूरत
    वोटर लिस्ट में इस बड़े बदलाव ने साफ कर दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बढ़ने वाली है। वोटों का संतुलन बदलने से कई सीटों पर परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं, ऐसे में सभी दलों को अपने वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर खास ध्यान देना होगा।

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