
पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में शपथ लेते ही अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. सत्ता के गलियारों में कई नामों की चर्चा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी के नाम का एलान नहीं हुआ है. एनडीए खेमे के भीतर भी मंथन जारी है कि राज्य की कमान किस चेहरे को सौंपी जाए. इसी राजनीतिक सरगर्मी के बीच केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने साफ कर दिया है कि वे बिहार के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वे खुद को मुख्यमंत्री की रेस में नहीं देखते ऐसे में इस बयान के बाद उन अटकलों पर विराम लगता दिख रहा है जिनमें चिराग को संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जा रहा था.
बता दें कि चिराग पासवान भले ही खुद को रेस से बाहर बता रहे हों. लेकिन उनकी पार्टी एलजेपी (रामविलास) के कई विधायक और मंत्री खुलकर कह रहे हैं कि वे चाहते थे कि चिराग ही बिहार के मुख्यमंत्री बनें. पार्टी के अंदर एक मजबूत धड़ा मानता है कि चिराग पासवान युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरा हैं और उन्हें मौका मिलना चाहिए. हालांकि, एलजेपी (आर) के कई नेताओं का कहना है कि अंतिम फैसला एनडीए के शीर्ष नेतृत्व को ही करना है. वे मानते हैं कि मुख्यमंत्री कौन होगा यह भाजपा और एनडीए के बड़े नेताओं की रणनीति और सहमति से तय होगा.
सूत्रों के मुताबिक नया मुख्यमंत्री चुनने से पहले एनडीए विधायकों की बैठक बुलाई जाएगी. इसी बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा जो आगे चलकर मुख्यमंत्री की शपथ लेगा. हालांकि यह बैठक कब होगी. इसकी आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. यही वजह है कि पटना से दिल्ली तक राजनीतिक अटकलों का दौर लगातार जारी है.
इस बीच एलजेपी (रामविलास) के विधायकों और नेताओं का मानना है कि चिराग पासवान राज्य के लिए एक बेहतर और युवा विकल्प हो सकते थे. पार्टी के विधायक राजू तिवारी कहते हैं कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी यही भावना है कि चिराग को बड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. वहीं, संजय पासवान का कहना है कि एलजेपी (आर) के कार्यकर्ता और नेता भावनात्मक रूप से चिराग के साथ हैं. हालांकि वे यह भी जोड़ते हैं कि गठबंधन की राजनीति में अंतिम फैसला सामूहिक होता है और सभी उसी का सम्मान करेंगे. जबकि, विधायक संजय सिंह बताते हैं कि वे व्यक्तिगत तौर पर चाहते थे कि चिराग पासवान को मौका मिले. लेकिन वे कहते हैं कि पार्टी लाइन और एनडीए नेतृत्व के फैसले के आगे सभी को झुकना होगा.
दूसरी ओर विधायक उदय कुमार सिंहकी राय में चिराग पासवान ने खुद को सीएम रेस से अलग कर एक परिपक्व नेता होने का परिचय दिया है. वे मानते हैं कि इससे गठबंधन के भीतर संदेश गया है कि चिराग पद से ज्यादा स्थिर सरकार को महत्व देते हैं. पार्टी नेता सीमांत मृणाल कहते हैं कि एलजेपी (आर) में कोई मतभेद नहीं है. सभी नेता एनडीए के फैसले के साथ खड़े रहेंगे. वे यह भी कहते हैं कि जो भी नया मुख्यमंत्री बनेगा. एलजेपी (आर) उसकी सरकार को पूरा समर्थन देगी.
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. चिराग पासवान ने खुद को रेस से बाहर कर दिया है. लेकिन उनके नाम पर पार्टी के अंदर जो समर्थन दिखा. उसने राजनीतिक हलचल को और दिलचस्प बना दिया है. अब सबकी नजरें एनडीए की आगामी बैठक और शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं. जब तक नया नाम सामने नहीं आता. तब तक बिहार की सियासत में यह सवाल बना रहेगा कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा.
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