
नई दिल्ली. अमेरिका (America) द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर लागू किए गए नौसैनिक ब्लॉकेड (naval blockade) का असर पहले ही दिन दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लॉकेड के पहले पूरे दिन ईरान (Iran) के किसी भी बंदरगाह से कोई जहाज बाहर नहीं निकला. इतना ही नहीं, करीब छह व्यापारी जहाज अमेरिकी चेतावनी के बाद रास्ते से ही वापस लौट गए. दावा है कि पिछले 24 घंटे में स्ट्रेट से 20 से ज्यादा जहाज गुजरे हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ‘जंग खत्म होने के करीब’ है.
दिलचस्प बात यह रही कि इस दौरान एक भी गोली नहीं चली और किसी तरह की सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ी. यानी बिना टकराव के ही अमेरिका ने अपनी रणनीति का असर दिखा दिया. विशेषज्ञ इसे “साइलेंट प्रेशर” की रणनीति बता रहे हैं, जहां ताकत का इस्तेमाल किए बिना ही विरोधी को पीछे हटने पर मजबूर किया जाता है.
हालांकि, दूसरी तरफ होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक सामान्य बना रहा. पिछले 24 घंटों में 20 से ज्यादा कमर्शियल जहाज बिना किसी रुकावट के इस रास्ते से गुजरे. इससे साफ है कि अमेरिका का ब्लॉकेड फिलहाल सिर्फ ईरान से जुड़े जहाजों को टारगेट कर रहा है, जबकि बाकी देशों के लिए रास्ता खुला रखा गया है. हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो शिपिंग डेटा से पता चला कि ईरान से जुड़े तीन टैंकरों समेत कम से कम आठ स्ट्रेट के रास्ते से गुजरे हैं.
‘ईरान जंग खत्म होने के करीब’, बोले ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को अपनी बड़ी रणनीतिक सफलता के तौर पर पेश किया है. उन्होंने दावा किया कि यह ऑपरेशन प्रभावी रहा है और ईरान बिना टकराव के ही दबाव में आ गया है. इनके अलावा फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा, “अगर हमने यह कदम नहीं उठाया होता, तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार होता.” जब उनसे पूछा गया कि क्या जंग खत्म हो गई है, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे लगता है कि यह अब खत्म होने के बहुत करीब है.”
होर्मुज को लेकर अब क्या कर रहा ईरान?
इस पूरी घटना में सबसे अहम बात यह है कि ईरान ने फिलहाल सीधे टकराव से बचने का रास्ता चुना है. जहाजों का वापस लौटना इस बात का संकेत है कि तेहरान अभी स्थिति को और भड़काना नहीं चाहता. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि असली परीक्षा अभी बाकी है.
आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे, जब यह तय होगा कि ईरान इस दबाव को स्वीकार करता है या फिर किसी बड़े जवाबी कदम की तैयारी करता है. अगर ईरान ने स्ट्रेट में अपनी पकड़ मजबूत करने या अमेरिकी जहाजों को चुनौती देने की कोशिश की, तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं.
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