
भुवनेश्वर: ओडिशा के भुवनेश्वर में रविवार को भारत की पहली उन्नत 3डी चिप पैकेजिंग यूनिट का शिलान्यास किया. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी मौजूद रहे. इसे देश की अगली पीढ़ी की चिप टेक्नोलॉजी के रूप में देखा जा रहा है, जो AI, रक्षा, और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को नई ऊर्जा प्रदान करेगी. यह ग्लास सबस्ट्रेट टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी. इस यूनिट में ₹1,900 करोड़ का निवेश किया जाएगा.
उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ओडिशा में सेमीकंडक्टर प्लांट की आधारशिला रखे जाने को ऐतिहासिक दिन बताया. उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन सेमीकंडक्टर प्लांट का शिलान्यास हुआ है. उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर जैसे कांप्लेक्स टेक्नॉलॉजी को भारत और ओडिशा लाने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि ओडिशा आईटी और टेक्नोलॉजी का हब होने जा रहा है, हाई टेक तकनीक का हब होने जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस प्लांट में दुनिया की सबसे ज्यादा एडवांस तकनीक के चिप बनेंगे. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरर बना है.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह परियोजना न केवल राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगी, बल्कि ओडिशा को देश के प्रमुख आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी. उन्होंने कहा कि ओडिशा अब पारंपरिक धातु और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर अत्याधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है. उन्होंने जोर दिया कि विश्वस्तरीय तकनीक से लैस यह सेमीकंडक्टर प्लांट राज्य को वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक बनाएगा और आईटी हब के रूप में उसकी पहचान को मजबूत करेगा.
वहीं ओडिशा सरकार के ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विशाल देव ने भी इस परियोजना को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि 3D Glass Solutions Inc. (3DGS) जैसी वैश्विक कंपनी का निवेश ओडिशा के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि इस कंपनी के निवेशकों में Intel और Lockheed Martin जैसे दिग्गज शामिल हैं, जो इस परियोजना की विश्वसनीयता को दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि इससे ओडिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में और अधिक निवेश के रास्ते खुलेंगे.
केंद्र सरकार ने पिछले साल 2025 में ओडिशा में दो प्रमुख सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी थी. इनमें सिक्ससेम प्राइवेट लिमिटेड (SiCSem) और 3डी ग्लास सॉल्यूशंस इंक (3DGS) शामिल हैं. SiCSem ब्रिटेन की Clas-SiC Wafer Fab Ltd. के सहयोग से भुवनेश्वर के इंफो वैली में भारत की पहली कमर्शियल कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करेगी.
यह यूनिट सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) आधारित उपकरणों के निर्माण पर केंद्रित होगी, जिसकी सालाना क्षमता 60,000 वेफर्स और 9.6 करोड़ यूनिट्स पैकेजिंग की होगी. इनका उपयोग रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन, रेलवे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा. वहीं 3DGS एक उन्नत पैकेजिंग और एम्बेडेड ग्लास सबस्ट्रेट यूनिट स्थापित करेगी. यह ग्लास इंटरपोजर और 3डी हेटेरोजेनियस इंटीग्रेशन मॉड्यूल जैसी तकनीकों को पेश करेगी. इस यूनिट से प्रति वर्ष 69,600 ग्लास पैनल सबस्ट्रेट और 5 करोड़ असेंबल यूनिट का उत्पादन होने की उम्मीद है. इनका उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और फोटोनिक्स में होगा।
देशभर में केंद्र सरकार ने 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें कुल निवेश 1.6 लाख करोड़ रुपए से अधिक है. इनमें से दो परियोजनाएं ओडिशा में स्थित हैं. इस पहल से 2,000 से अधिक कुशल रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रहा है.
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