
उज्जैन। भारतीय परंपरा (Indian tradition) में पीले रंग को शुभता, समृद्धि (Auspiciousness, Prosperity) और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि पूजा-पाठ में पीले फूलों, खासकर गेंदा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि यह फूल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, गेंदा का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है। इसकी खुशबू वातावरण को शुद्ध करती है और तनाव को कम करने में सहायक मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसके फूलों का उपयोग करने से धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और घर में खुशहाली आती है।
वास्तु के अनुसार, घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) देवताओं का स्थान माना जाता है।
इस दिशा में गेंदे का पौधा लगाने से सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। अगर यहां जगह न हो, तो इसे उत्तर या पूर्व दिशा में भी रखा जा सकता है।
घर के प्रवेश द्वार पर गेंदा के फूलों का तोरण लगाना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती।
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही दिशा में लगाया गया गेंदा का पौधा न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि सकारात्मक माहौल और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। हालांकि, ये मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं-इनका वैज्ञानिक आधार अलग-अलग हो सकता है।
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