
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं फर्जीवाड़े की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि ग्वालियर से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां व्यापमं कांड में बर्खास्त किए गए छात्रों को कथित तौर पर 16-16 लाख रुपये लेकर बिना परीक्षा दिए ही MBBS की डिग्रियां बांटने का बड़ा खुलासा हुआ है। इस गंभीर मामले के उजागर होने के बाद अब गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं।
इस पूरे घोटाले की शुरुआत तब हुई जब जीवाजी यूनिवर्सिटी से संबंधित GRMC की छात्र शाखा (UG) के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी का एक ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में वह बर्खास्त छात्रों को बिना एग्जाम दिए 16-16 लाख रुपये में डिग्री दिलाने की बात करते सुनाई दे रहे थे। मामला गरमाते ही मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने आनन-फानन में प्रशांत चतुर्वेदी को पद से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया। हालांकि, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि डिग्री देने का काम यूनिवर्सिटी का है, उनका नहीं।
गजराराजा मेडिकल कॉलेज जहां यूनिवर्सिटी की ओर इशारा कर रहा है, वहीं जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कुलगुरु का दावा है कि यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसी कोई डिग्री जारी नहीं की गई है और शिकायतकर्ता को मांगी गई जानकारी RTI के तहत दे दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि इस विवाद से यूनिवर्सिटी का कोई लेना-देना नहीं है।
व्यापमं कांड के बर्खास्त छात्र और इस मामले को उजागर करने वाले संदीप लहरिया ने आरोप लगाया है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी मिलकर इस बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। लहरिया का कहना है कि उन्होंने जो जानकारी मांगी थी, वह उन्हें अब तक नहीं दी गई है। अब वे इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं और इसमें CBI को भी पक्षकार (पार्टी) बनाएंगे।
गौरतलब है कि व्यापमं कांड में करीब 150 छात्रों पर FIR हुई थी, जिनमें से 30 से ज्यादा छात्र बर्खास्त हुए थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि:
अधिकारियों की खींचतान और दस्तावेजों की गैरमौजूदगी ने इस शक को पुख्ता कर दिया है कि यह घोटाला काफी गहरा है और इसके तार कई बड़े अधिकारियों से जुड़े हो सकते हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved