
वॉशिंगटन. पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच पेंटागन (Pentagon) ने बुधवार को अचानक घोषणा की कि नौसेना सचिव (US Navy Secretary) जॉन फेलन (John Fallon) अपना पद छोड़ रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में किसी सैन्य सेवा के प्रमुख का यह पहला इस्तीफा है। हालांकि, रक्षा विभाग में पिछले कुछ समय से कई बड़े अधिकारियों को हटाया जा रहा है।
फेलन के अचानक हटने का कोई कारण नहीं बताया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है और दुनिया भर में तेहरान से जुड़े जहाजों को निशाना बना रही है। अब ट्रंप के करीबी और अंडरसेक्रेटरी हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। काओ नौसेना में 25 साल तक रहे हैं और उनके पास युद्ध का अनुभव भी हैं।
फेलन का पद से हटना पेंटागन के शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल की एक लंबी कड़ी का हिस्सा हो सकता है। कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल रैंडी जॉर्ज को पद से हटा दिया था। हेगसेथ ने पिछले साल पद संभालने के बाद से कई जनरलों और एडमिरलों को हटाया है। इनमें एडमिरल लीसा फ्रेंचेती और जनरल जिम स्लाइफ भी शामिल हैं। ट्रंप ने जनरल चार्ल्स सीक्यू ब्राउन जूनियर को भी उनके पद से हटा दिया है।
फेलन का इस्तीफा बहुत चौंकाने वाला है। उन्होंने मंगलवार को ही वाशिंगटन में नौसेना के एक सम्मेलन में हिस्सा लिया था। वहां उन्होंने पत्रकारों से अपने एजेंडे पर बात की थी। उन्होंने सांसदों के साथ बजट और नए जहाज बनाने की कोशिशों पर भी चर्चा की थी। हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि फेलन तुरंत अपना पद छोड़ रहे हैं।
बता दें कि फेलन ने पहले कभी सेना में काम नहीं किया था। उन्हें नौसेना में बड़े बदलाव करने के लिए लाया गया था। वे एक निजी निवेश कंपनी के संस्थापक भी रहे हैं। फेलन ऐसे समय में जा रहे हैं जब नौसेना बहुत व्यस्त है। उसके तीन विमानवाहक पोत मध्य पूर्व में तैनात हैं। साथ ही नौसेना कैरिबियन में ड्रग्स के खिलाफ अभियान चला रही है। जनवरी में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने में भी नौसेना की अहम भूमिका थी।
नए कार्यवाहक सचिव हंग काओ वियतनाम से आए शरणार्थी हैं। 1970 के दशक में जब वे बच्चे थे, तब अपने परिवार के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आ गए थे। उन्होंने वर्जीनिया से सीनेट का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। काओ सेना में विविधता (डीईआई) कार्यक्रमों और कोरोना वैक्सीन की अनिवार्यता के कड़े विरोधी रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद पर भी सवाल उठाए थे। काओ ने नौसेना अकादमी से पढ़ाई की है और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में अपनी सेवाएं दी हैं।
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