
सांसद की तरफ से आईडीए में कौन जाएगा?
भले ही इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की कुर्सी भोपाल (Bhopal) में अटक गई हो, लेकिन इसी कुर्सी के दाएं-बाएं बैठने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। यानि संचालक मंडल में आने के लिए कई भाजपाई प्रयासरत हैं। इनमें सांसद (MP) शंकर लालवानी (Shankar Lalwani) के समर्थकों की संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है। फिलहाल लालवानी पर ये समर्थक दबाव बनाए हुए हैं। इनमें सतीश शर्मा, संकल्प वर्मा और बंटी गोयल के नाम सामने आ रहे हैं, जो आईडीए के संचालक मंडल में आना चाहते हैं। इन्हीं में आपस में शीतयुद्ध देखा जा रहा है। दूसरी ओर कहा जा रहा है कि पार्षद पुत्र विशाल गिदवानी भी इस दौड़ में आगे हैं और वे अपने आपको किसी सुरक्षित जगह पर फिट करने के मूड में हैं। अब देखना यह है कि कौन-सा चेहरा सांसद के नजदीक है, जो आईडीए के संचालक मंडल में देखा जाएगा।
प्रदेश महामंत्री क्यों नहीं आते बैठक में?
भाजपा ने मंडल और वार्ड की बैठक में उस क्षेत्र में रहने वाले राष्ट्रीय और प्रदेश के पदाधिकारियों को भी उपस्थित रहने के लिए कहा है, लेकिन कई पदाधिकारी शहर में होने के बावजूद गैरहाजिर रहते हैं। इसी को लेकर जब पांच नंबर की बैठक में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे को लेकर बात हुई तो सब एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। गौरव इंदौर में रहने के बावजूद पार्टी के आयोजन में नहीं आते हैं, ये सवाल एक भाजपाई ने कर लिया। उन्होंने सुमित मिश्रा से पूछ लिया कि भाईसाब लगातार तीन बैठकों में नहीं आने वालों को पार्टी से निष्कासित किया जाता है तो क्या इन पर भी कोई कार्रवाई होगी। हालांकि सुमित के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
तो क्या इनको टिकट नहीं मिलेगा?
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर विधानसभा स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है और इन्हें विधानसभा मजबूत करने का जिम्मा सौंपा है। इनमें राजा चौकसे, अमन बजाज, रघु परमार, विनय बाकलीवाल जैसे इंदौरी नेता भी शामिल हैं। हालांकि ये भी कहीं न कहीं विधानसभा के दावेदारों में शामिल हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें जो जवाबदारी दी है, उससे सवाल खड़ा होने लगा है कि इन्हें विधानसभा में टिकट दिया जाएगा या नहीं। नेता भी पसोपेश में है कि चुनाव में दो साल है और सारा ध्यान दूसरी विधानसभा में लगाएंगे तो अपने क्षेत्र में कुछ नहीं कर पाएंगे। यूं भी अभी माहौल भाजपा के पक्ष में है। ऐसे में विधानसभा में मेहनत करना और जरूरी हो गया है।
जनता जाए भाड़ में, नेताजी के घर में 24 घंटे पानी
चारों ओर पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं। उन्होंने तो सीधे अपने घर तक हाइड्रेंड से ही बड़ी लाइन डाल ली और उसमें से अपने-अपनों को कनेक्शन भी बांट दिए। इसका खुलासा तब हुआ, जब हाइड्रेंड में पानी कम आने लगा। आसपास खुदाई की तो मालूम पड़ा कि आम लोगों को पानी नहीं मिल रहा है और नेताजी के घर 24 घंटे पानी की सप्लाई हो रही है। मामला मालवा मिल से जुड़ा हुआ है और नेता के ग्रुप में एक पूर्व पार्षद भी हैं, जिनके कार्यकाल में रहते नगर निगम के लोगों ने ये आजीवन इंतजाम कर दिया था। हालांकि अब लाइन काट दी गई है और चेता दिया हैकि जिस प्रकार से लोगों को पानी मिल रहा है, उसी प्रकार से आपको मिलेगा। नेताओं ने पानी की लाइन फिर जुड़वाने की कोशिश की, लेकिन उनकी एक न चली।
खलघाट की बजाय भूरिया दिखे इंदौर में
कांग्रेस के किसान आंदोलन में विक्रांत भूरिया इंदौर के मंच पर देखे गए, जबकि उनका क्षेत्र आदिवासी इलाका है। वैसे वहां कांग्रेस ने आंदोलन करने को नहीं कहा था, लेकिन खलघाट में अपनी दाल न गलती देख भूरिया इंदौर के आंदोलन में शामिल हो गए। कहने वाले कह रहे हैं कि आने वाले समय में भूरिया चुनाव लड़ने वाले हैं, लेकिन उनका दखल कोई अपनी विधानसभा में नहीं चाहता है। हालांकि जब से भूरिया को अजा वर्ग की जवाबदारी सौंपी है, तब से उनके बाहरी दौरे खूब हो रहे हैं और वे अपनी विधानसभा पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। खैर आने वाला समय ही बता पाएगा कि भूरिया को कहां से टिकट मिलेगा?
नेताजी अपनी ही पार्टी से परेशान हैं
कांग्रेस के एक प्रदेश पदाधिकारी अपनी बयानबाजी से कभी मीडिया तो कभी सोशल मीडिया में छाए रहते हैं। पिछले दिनों एक ब्लाक अध्यक्ष को क्या हटाया, इस पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दे डाली और राहुल गांधी को लंबा-चौड़ा पत्र लिख दिया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हतोत्साहित किया जा रहा है। अगर वे अपनी ही पार्टी में आवाज नहीं उठाएंगे तो फिर कहां जाएंगे? उन्होंने पत्र में कुछ पुरानी घटनाओं का उल्लेख भी किया जो अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है। उनके निशाने पर उनके घोर प्रतिद्वंद्वी थे, लेकिन किसी का आज तक कुछ बिगड़ नहीं पाया है।
इंदौर में कमजोर पड़ा आप का संगठन
मध्यप्रदेश में जिस जोर-शोर से आम आदमी पार्टी ने एंट्री की थी, उनका संगठन अब ठंडा पड़ने लगा है। केवल पार्टी के आदेश पूरा करने के लिए ही आप के नेता मैदान में नजर आते हैं, बाकी सब अपने-अपने काम-धंधे में व्यस्त हैं। अभी पिछले दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने पर सात दिन बाद आंदोलन किया, उसमें भी स्थानीय कार्यकारिणी पूरी तरह से शामिल नहीं हो पाई। फिर भी 20-25 लोगों ने आंदोलन की लाज रख ली।
एमआईसी में एक महत्वपूर्ण विभाग से जुड़े एक पार्षद पर चारों ओर से उनकी ही पार्टी के नेता हमला बोले हुए हैं। कारण, वे एक तो किसी की सुनते नहीं है और दूसरा वे अपने आपको किसी विधायक से कम नहीं आंकते हैं, जिस कारण उनके विभाग से संबंधित कामों में खूब छिछालेदारी हो रही है, लेकिन पार्षद के चेहरे का पानी नहीं उतर रहा।
-संजीव मालवीय
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