
नई दिल्ली(New Delhi)। ज्येष्ठ अमावस्या(Jyeshtha Amavasya) हिंदू धर्म (Hinduism)में अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है, जिसे पितरों(Pitrs) की शांति(peace) के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितर अपने वंशजों से तर्पण(Tarpan) और श्राद्ध स्वीकार करने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं। इस कारण यह दिन पितृ कृपा प्राप्त करने और पितृ दोष (Pitru Dosha)को शांत करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या 15 मई को पड़ रही है, और इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना अधिक मिलता है।
2. पितृ तर्पण और पूजा की सही विधि
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और संभव हो तो किसी पवित्र नदी या घर पर ही शुद्ध जल से तर्पण किया जाता है। तर्पण के समय हाथ में काले तिल, जौ और कुश लेकर पितरों को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। दोपहर का समय पितृ कार्यों के लिए सर्वोत्तम होता है। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को दान देना और पक्षियों को अन्न डालना भी पुण्यकारी माना गया है। इस दिन वाणी और आचरण की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
3. पितृ दोष निवारण के प्रभावशाली मंत्र
ज्येष्ठ अमावस्या पर मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इन मंत्रों के नियमित जाप से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। प्रमुख मंत्रों में
ॐ पितृ देवतायै नमः
ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः
इन मंत्रों का श्रद्धा भाव से जाप करने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।
4. आज के समय में ज्येष्ठ अमावस्या की प्रासंगिकता
आधुनिक जीवन में तनाव, आर्थिक परेशानियां और पारिवारिक असंतुलन बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में ज्येष्ठ अमावस्या जैसे पर्व हमें आध्यात्मिक संतुलन और आस्था से जोड़ते हैं। यह दिन केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का भी माध्यम है। पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने की यह परंपरा आज भी समाज में संस्कारों को मजबूत करती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश देती है।
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