
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)की राजधानी (capital)श्रीनगर(Srinagar) में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला(Omar Abdullah’s) के आवास के बाहर शराबबंदी की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और करीब 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
BJP का तीखा हमला, बयान ने बढ़ाया विवाद
प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार राजस्व (रेवेन्यू) के नाम पर शराब की बिक्री को बढ़ावा दे रही है, जो युवाओं के भविष्य के लिए नुकसानदायक है। बीजेपी महासचिव अनवर खान के एक बयान ने विवाद और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि “अगर सरकार को सिर्फ रेवेन्यू की चिंता है तो हम मस्जिदों के बाहर बैठकर भीख मांग लेंगे।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और इसे लेकर बहस तेज हो गई है।
शराबबंदी को लेकर BJP का अल्टीमेटम
बीजेपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने शराबबंदी पर कोई कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि यह विरोध काजीगुंड से लेकर करनाह (LoC क्षेत्र) तक फैलाया जाएगा। नेताओं का कहना है कि कश्मीर की पहचान सूफी और संत परंपरा से जुड़ी है, इसलिए यहां शराब की बिक्री का विरोध जरूरी है।
सरकार और विपक्ष का जवाब
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही शराबबंदी की मांग को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि राजस्व और प्रशासनिक कारणों से इस तरह का फैसला आसान नहीं है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी संकेत दिया कि शराब पर प्रतिबंध लगाने से राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैन लगाने से अवैध तस्करी बढ़ सकती है।
राजनीतिक टकराव तेज
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने पलटवार करते हुए कहा कि मौजूदा आबकारी नीति पहले की सरकारों के समय बनी थी, जिसमें BJP भी शामिल थी। पार्टी का कहना है कि आज जो मुद्दा उठाया जा रहा है, उसकी नींव पहले ही डाली जा चुकी थी।
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