
रायपुर: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं. रायपुर में ‘अत्याधुनिक डायल 112’ सेवा और फॉरेंसिक मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाने के बाद वे बस्तर पहुंचे. इसके बाद नेतानार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने जनसभा को संबोधित किया.
उन्होंने कहा कि आज का दिन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण और भावुक है. सालों तक नक्सली हिंसा से जूझते रहे देश ने आखिरकार एक बड़ी सफलता हासिल की है. इस संघर्ष में कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन उनके साहस और बलिदान ने नक्सलवाद जैसी बड़ी चुनौती को कमजोर कर दिया. लंबे समय तक देश की जनता नक्सली हिंसा से परेशान रही है. खासकर बस्तर और आसपास के इलाकों में लोगों के मन में हमेशा डर और असुरक्षा का माहौल बना रहता था.
21 जनवरी 2024 को सरकार ने यह संकल्प लिया था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म किया जाएगा. अब सरकार का कहना है कि यह लक्ष्य हासिल कर लिया गया है. इस सफलता का श्रेय सुरक्षाबलों के साहस, रणनीति और स्थानीय लोगों के सहयोग को दिया जा रहा है. सरकार ने इसे मां दंतेश्वरी की कृपा और जवानों के बलिदान का परिणाम बताया है.
नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विकास की नई शुरुआत की जा रही है. सरकार ने घोषणा की है कि सुरक्षाबलों के 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अब जन सेवा केंद्र में बदला जाएगा. इन केंद्रों के माध्यम से बस्तर के लोगों को करीब 370 सरकारी सेवाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी.
इन जन सेवा केंद्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण, प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम और कई सरकारी योजनाओं की सुविधाएं भी दी जाएंगी. सरकार ने इन केंद्रों का नाम “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” रखने का फैसला किया है, ताकि यह स्थान लोगों की सेवा और विकास का प्रतीक बन सके. इसके साथ ही गृहमंत्री सरेंडर कर चुके नक्सलियों से संवाद करेंगे और बस्तर के विकास का रोडमैप भी जनता के सामने रखा जाएगा. सरकार का मकसद अब बस्तर में शांति, विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां हिंसा नहीं बल्कि तरक्की का रास्ता चुनें.
गृहमंत्री ने कहा कि विकसित बस्तर के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है और बस्तर के विकास का संकल्प पूरा किया जाएगा. उन्होंने बताया कि पहले क्षेत्र को सुरक्षित किया गया, अब इसे विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडूम जैसे आयोजनों को क्षेत्र की पहचान बताया और कहा कि सुरक्षा बलों जैसे सीआरपीएफ, कोबरा और डीआरजी के योगदान से ही यह बदलाव संभव हो पाया है. सरकार ने बस्तर को देश का सबसे विकसित क्षेत्र बनाने का वादा किया.
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