
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत (Court) ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा (Mahila Congress President Alka Lamba) को 2024 में जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर हुए प्रदर्शन (Protest) के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के बावजूद उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित किया।
यह मामला 29 जुलाई 2024 का है, जब जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया गया था। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उस समय क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, इसके बावजूद अलका लांबा अपने समर्थकों के साथ संसद की ओर बढ़ीं, बैरिकेड तोड़े और नारेबाजी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने संसद का घेराव करने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों को धक्का दिया, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। पुलिस गवाहों ने अदालत में बयान दिया कि अलका लांबा प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही थीं और घेराव का आह्वान कर रही थीं।
अदालत में पेश सबूतों और वीडियो फुटेज को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया। अदालत ने माना कि पुलिस द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आदेशों की अवहेलना की और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध किया।
फैसले में कहा गया कि अलका लांबा और अन्य प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई से पुलिसकर्मियों के कर्तव्यों में बाधा उत्पन्न हुई और आम जनता को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। अदालत ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। इस मामले में सजा पर बहस के लिए अगली सुनवाई 4 जून को होगी। उन्हें अधिकतम दो साल तक की सजा हो सकती है।
फैसले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए अलका लांबा ने कहा कि वह महिला अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण के मुद्दे को उठाने को लेकर की गई है और वह इससे डरने वाली नहीं हैं।
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