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गाड़ियों के हिसाब से चुन सकेंगे इथेनॉल मिक्स पेट्रोल, अब पेट्रोल पंपों पर मिलेगी सूची, जानें सरकार का प्लान

May 29, 2026

नई दिल्ली। आने वाले दिनों में जब आप अपनी गाड़ी (vehicles) में तेल भरवाने पेट्रोल पंप (Petrol Pump) पर जाएंगे, तो आपको वहां पेट्रोल के कई विकल्प (Option) दिखाई देंगे। सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत वाहन मालिक अपनी कार या बाइक के इंजन की क्षमता और अनुकूलता के हिसाब से खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें कितने फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ जियो-बीपी, नायरा एनर्जी और शेल जैसी निजी कंपनियों को भी ई20, ई22, ई25 और ई30 ईंधन बेचने के लिए बुनियादी ढांचा बनाने की सलाह दी है। ई20 पेट्रोल में 80 फीसदी शुद्ध पेट्रोल होता है और 20 फीसदी इथेनॉल मिलाया जाता है।

यह कदम नए इथेनॉल मिश्रणों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के हालिया मानदंडों के बाद उठाया गया है। यह सरकार के अप्रैल के उस प्रस्ताव के ठीक बाद आया है, जिसमें पूरी तरह से इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने की बात कही गई थी।


  • उपभोक्ताओं में नए ईंधन को लेकर दो बड़ी चिंताएं
    दरअसल, सरकार के इस कदम के पीछे इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं के मन में दो सबसे बड़ी चिंताएं हैं, जिन्हें लेकर बाजार में लगातार बहस चल रही है।

    पहली चिंता: इथेनॉल में शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा घनत्व कम होता है। इसका मतलब है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, गाड़ी का माइलेज उतना ही कम होने की आशंका रहती है। हालांकि, सरकार का दावा है कि ई20 से प्रदर्शन एवं पिकअप बेहतर होता है और माइलेज में कोई भारी गिरावट नहीं आती।

    दूसरी चिंता: इंजन पुराना होने पर ज्यादा इथेनॉल वाला पेट्रोल उसके रबर पार्ट्स, पाइप और प्लास्टिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इथेनॉल में नमी सोखने की प्रवृत्ति होती है। इससे इंजन में जंग लगने का खतरा रहता है।

    पेट्रोल पंपों पर करने होंगे कुछ बदलाव
    देशभर में मौजूद करीब एक लाख पेट्रोल पंपों पर नई व्यवस्था लागू करने के लिए कुछ जमीनी बदलाव करने होंगे। खुदरा काउंटरों पर अलग-अलग मिश्रण वाला पेट्रोल बेचने के लिए अलग डिस्पेंसिंग नोजल, भूमिगत भंडारण टैंक और ब्लेंडिंग कंट्रोल सिस्टम लगाने होंगे। जानकारों के मुताबिक, यह बदलाव ज्यादा खर्चीला या जटिल नहीं होगा। मौजूदा डिस्पेंसिंग सिस्टम (जिसमें अभी प्रीमियम, रेगुलर और डीजल के नोजल होते हैं) का ही विस्तार किया जा सकता है। इसके भंडारण और टैंक का खर्च तेल कंपनियां खुद वहन करेंगी। पेट्रोल पंपों पर लगी मशीनों पर स्पष्ट अक्षरों में लिखना होगा कि वहां मिश्रित पेट्रोल का कौन सा वेरिएंट बिक रहा है, ताकि ग्राहक भ्रमित न हों। वेरिएंट के दाम भी अलग-अलग दिखाने होंगे।

    रणनीतिक कदम से होगा फायदा
    मौजूदा तेल संकट के बीच यह रणनीतिक कदम भारत के लिए फायदेमंद है। नवंबर, 2014 से फरवरी, 2026 के बीच इथेनॉल मिश्रण के कारण भारत ने 1.7 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है। देश में कार्बन उत्सर्जन में 8.7 करोड़ टन की कमी आई है, जो 35 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। मार्च, 2026 तक भारत का इथेनॉल उत्पादन बढ़कर 20 अरब लीटर हो चुका है, जबकि वर्तमान 20 फीसदी मिश्रण के लिए सिर्फ 11 अरब लीटर की जरूरत है। इस अतिरिक्त क्षमता को खपाने के लिए ई22 और ई30 जैसे विकल्प लाना जरूरी है, ताकि किसानों और चीनी मिलों को फायदा हो सके।

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