
नई दिल्ली । बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार बप्पी लहरी (Bappi Lahiri) भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपने डिस्को म्यूजिक (Disco Music) और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके कई गाने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हुए। इन्हीं में से एक गीत से जुड़ा ऐसा विवाद सामने आया, जिसने भारतीय संगीत को वैश्विक बहस के केंद्र में ला दिया। यह मामला कथित तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन (Copyright Infringement) से जुड़ा था, जिसमें एक हॉलीवुड गाने (Hollywood Song) पर बॉलीवुड धुन की नकल करने का आरोप लगाया गया।
यह घटना वर्ष 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘ज्योति’ के प्रसिद्ध गाने ‘थोड़ा रेशम लगता है’ से जुड़ी बताई जाती है, जिसे बप्पी लहरी ने संगीतबद्ध किया था और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। यह गाना रिलीज होते ही काफी लोकप्रिय हो गया था और भारतीय संगीत प्रेमियों के बीच इसकी अलग पहचान बन गई थी। वर्षों तक यह गाना लोगों की प्लेलिस्ट और सांस्कृतिक यादों में शामिल रहा। लेकिन इसके कई साल बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विवाद ने इस गाने को फिर से सुर्खियों में ला दिया।
विवाद की शुरुआत वर्ष 2002 के आसपास मानी जाती है, जब अमेरिकी हिप-हॉप आर्टिस्ट ट्रुथ हर्ट्स का गाना ‘Addictive’ रिलीज हुआ। इस गाने की शुरुआती धुन और बैकग्राउंड म्यूजिक को लेकर यह आरोप लगा कि इसमें ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन का इस्तेमाल किया गया है। यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और भारतीय संगीत से जुड़े लोगों ने इस पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी। सोशल मीडिया और संगीत जगत में इस समानता को लेकर बहस तेज हो गई।
इसके बाद बप्पी लहरी और म्यूजिक लेबल से जुड़े पक्षों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कानूनी कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाया। आरोप लगाया गया कि बिना अनुमति के भारतीय गाने की धुन का इस्तेमाल किया गया है। मामला अमेरिका की अदालत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क पेश किए। हॉलीवुड पक्ष की ओर से यह दावा किया गया कि यह धुन किसी विदेशी रेडियो से प्रेरित थी और उन्हें इसके कॉपीराइट की जानकारी नहीं थी।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने इस मामले में बप्पी लहरी और संबंधित म्यूजिक कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि जब तक मूल रचनाकारों को उचित क्रेडिट नहीं दिया जाएगा, तब तक संबंधित गाने की बिक्री और वितरण पर रोक लागू रहेगी। इसके साथ ही मुआवजे और रॉयल्टी को लेकर भी बड़ा वित्तीय निर्णय सामने आया, जिसकी राशि को लेकर यह मामला काफी चर्चित रहा और इसे अंतरराष्ट्रीय कॉपीराइट मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा गया।
यह विवाद केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं था, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि संगीत की रचनात्मकता और अधिकारों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। बप्पी लहरी का नाम इस मामले के बाद वैश्विक स्तर पर और अधिक चर्चा में आया, और भारतीय संगीत की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती मिली। यह केस संगीत उद्योग में कॉपीराइट कानूनों के पालन और रचनात्मक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।
बप्पी लहरी का निधन 2022 में हुआ, लेकिन उनका संगीत आज भी भारतीय सिनेमा का अहम हिस्सा बना हुआ है। उनके गाने और संगीत शैली आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करते रहेंगे।
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