
नई दिल्ली । कियारा आडवाणी (Kiara Advani) ने मां बनने के बाद महिलाओं के साथ समाज के बदलते व्यवहार और अपेक्षाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक इंटरव्यू (Interview) के दौरान उन्होंने प्रेग्नेंसी से लेकर पोस्टपार्टम दौर (The Postpartum Period)तक महिलाओं के अनुभवों पर खुलकर बात की और इसे लेकर समाज में मौजूद डबल स्टैंडर्ड (Double Standard) की ओर इशारा किया। कियारा ने कहा कि यह समय किसी भी महिला के जीवन का सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण चरण होता है, लेकिन इसके बावजूद समाज का व्यवहार (Societal Behaviour) कई बार असंतुलित और असंवेदनशील हो जाता है।
कियारा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अक्सर सराहा जाता है और उन्हें “ग्लोइंग” और “खूबसूरत” जैसे शब्दों से नवाजा जाता है। इस दौरान परिवार और समाज का रवैया काफी सकारात्मक दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही बच्चा जन्म लेता है, परिस्थितियां बदलने लगती हैं। उन्होंने कहा कि डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले स्वाभाविक बदलावों को समझने के बजाय उन्हें जज किया जाने लगता है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं से यह उम्मीद की जाती है कि वे तुरंत अपने पुराने फिगर और रूटीन में लौट आएं, जो वास्तविकता से काफी दूर है। कियारा के अनुसार यह सोच न केवल गलत है बल्कि नई मां के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है, लेकिन कई बार उन्हें आलोचना और तुलना का सामना करना पड़ता है, जो उनके लिए और अधिक कठिनाई पैदा करता है।
इंटरव्यू में कियारा ने यह भी कहा कि मदरहुड एक ऐसा अनुभव है जो महिला को भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह बदल देता है। इस बदलाव को स्वीकार करने और समझने के बजाय समाज अक्सर केवल बाहरी रूप पर ध्यान केंद्रित करता है। उन्होंने “गांव की जरूरत” वाली कहावत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बच्चे की परवरिश में पूरे समुदाय की भूमिका होती है, वैसे ही एक मां को संभालने के लिए भी परिवार और समाज का सहयोग जरूरी है।
कियारा आडवाणी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वह अपनी प्रोफेशनल लाइफ और नई जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना रही हैं। हाल ही में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी वापसी को लेकर भी संकेत दिए हैं और कहा है कि मदरहुड ने उन्हें एक बेहतर और अधिक समझदार कलाकार बनाया है। उनके बयान को कई लोगों ने महिलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कदम बताया है, जबकि कुछ इसे मनोरंजन जगत में चल रही चर्चाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
कियारा आडवाणी का यह बयान समाज में महिलाओं के प्रति बदलते नजरिए और पोस्टपार्टम दौर की वास्तविक चुनौतियों को उजागर करता है। यह चर्चा एक बार फिर इस बात को सामने लाती है कि मातृत्व केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक गहरा और संवेदनशील अनुभव है जिसे समझने की जरूरत है। आने वाले समय में ऐसे बयानों से इस विषय पर और अधिक जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।
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