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रूस से भारत पहुंची S-400 मिसाइल की चौथी खेप, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगा सुरक्षा

June 04, 2026

नई दिल्ली. रूस (Russia) से लंबी दूरी की एस-400 (S-400) वायु रक्षा प्रणाली की चौथी स्क्वॉड्रन (Fourth Squadron) भारत (India) को मिल गई है। इस घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को जल्द ही किसी संवेदनशील क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। इससे भारत की हवाई हमलों को नाकाम करने की क्षमता बढ़ गई है।

भारत ने साल 2018 में रूस से करीब 40,000 करोड़ रुपये में पांच एस-400 स्क्वॉड्रन खरीदने का समझौता किया था। इनमें से तीन स्क्वाड्रन करीब दो साल पहले ही भारत आ चुकी थीं और उन्हें रणनीतिक रूप से तैनात किया जा चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाकी दो स्क्वॉड्रनों की आपूर्ति में देरी हुई। पांचवीं स्क्वॉड्रन के अगले कुछ महीनों में भारत पहुंचने की उम्मीद है। चौथी स्क्वॉड्रन के आने से पूर्वी लद्दाख से लेकर पाकिस्तान से सटी सीमा तक हवाई सुरक्षा पुख्ता हो जाएगी।


  • पांच और स्क्वॉड्रन की तैयारी…
    सरकार ने रूस से एस-400 की पांच और स्क्वॉड्रन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वायुसेना इन प्रणालियों को व्यापक सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस नेटवर्क के तहत एकीकृत कर रही है। इस नेटवर्क में एस-400 के अलावा मध्यम दूरी की बराक-8 और अन्य प्रणालियां एक साझा कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे के तहत जोड़ी जा रही हैं।

    इसलिए खास
    एस-400 एक अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे दुश्मन के हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।
    यह लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है।
    इसकी मारक क्षमता 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक है।
    सिस्टम 100 फीट से लेकर करीब 40 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ रहे टारगेट को निशाना बना सकता है।
    एस-400 में चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलें होती हैं, जो अलग दूरी के लक्ष्यों को नष्ट कर सकती हैं।
    एक एस-400 रेजीमेंट में 8 लॉन्चर होते हैं और एक समय में 32 मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
    यह सिस्टम संभावित न्यूक्लियर मिसाइल खतरे को भी हवा में ही खत्म करने में सक्षम माना जाता है।
    दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को लंबी दूरी से ट्रैक और लॉक करने की क्षमता रखता है।
    इसे आसानी से डिटेक्ट या निशाना बनाना मुश्किल होता है क्योंकि इसकी तैनाती मोबाइल प्लेटफॉर्म पर होती है।
    माइनस 50 से माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तक के बेहद ठंडे मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
    नाटो देशों में इस सिस्टम को SA-21 ग्रोवलर के नाम से जाना जाता है।
    यह किसी भी क्षेत्र की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने वाला भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली रक्षा सिस्टम माना जाता है।

    ऑपरेशन सिंदूर में दिखा दम
    एस-400 डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन वायुसेना की क्षमता को पंगु कर दिया था।
    इस प्रणाली ने 300 किमी से ज्यादा दूर उड़ रहे पाकिस्तान के महत्वपूर्ण निगरानी विमान को मार गिराया था।
    यह हमला सैन्य हलकों में जो सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का रिकॉर्ड किल माना गया है।
    भारत और रूस के बीच क्या समझौता हुआ था?

    भारत ने रूस के साथ अक्तूबर 2018 में पांच अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता किया था।
    समझौते के तहत मिसाइल प्रणाली की पांच यूनिट खरीदने की बात हुई थी। इनमें से तीन यूनिट पहले ही मिल चुकी हैं।
    सूत्रों के अनुसार, पांचवीं यूनिट नवंबर तक मिलने की उम्मीद है, जो नई तय समयसीमा के अनुसार दी जाएगी।
    एस-400 मिसाइल प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।
    पिछले महीने भारत ने रूस से पांच और एस-400 प्रणाली खरीदने की मंजूरी दी, जिससे इनकी कुल संख्या 10 हो जाएगी।

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