नई दिल्ली। भारत में सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना (Delhi Gymkhana Club) को सरकारी जमीन खाली करने का नोटिस दिए जाने के बीच पड़ोसी पाकिस्तान (Pakistan) में एक पुराने एलीट क्लब को लेकर बहस तेज हो गई है। चर्चा का केंद्र (Lahore Gymkhana Club) है, जो कथित तौर पर अरबों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर बेहद कम किराए में संचालित हो रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 1913 में स्थापित लाहौर जिमखाना क्लब पाकिस्तान के सबसे महंगे इलाकों में गिने जाने वाले लाहौर के माल रोड, जेल रोड और जफर अली रोड से घिरे क्षेत्र में करीब 112 एकड़ जमीन पर फैला है। बताया जा रहा है कि इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 218 अरब पाकिस्तानी रुपये आंकी गई है, जबकि क्लब का वार्षिक किराया महज 5,000 रुपये बताया जा रहा है।
पाकिस्तान की 2023 की लीज नीति के अनुसार, क्लबों को बाजार दर के एक हिस्से के आधार पर किराया देना चाहिए। इस हिसाब से लाहौर जिमखाना का किराया करोड़ों रुपये सालाना बनता है, लेकिन वास्तविक भुगतान इससे काफी कम बताया जा रहा है। इसी वजह से इस मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है।
क्लब की सदस्यता व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इसकी सदस्यता मुख्य रूप से वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों या विरासत के आधार पर सीमित दायरे में उपलब्ध होती है। आम लोगों की पहुंच यहां बेहद सीमित मानी जाती है।
इसके साथ ही पाकिस्तान में सरकारी जमीनों के उपयोग और कथित विशेषाधिकारों को लेकर न्याय व्यवस्था तथा प्रशासनिक फैसलों पर भी बहस छिड़ी हुई है। आलोचकों का कहना है कि जहां गरीब बस्तियों पर तेजी से कार्रवाई होती है, वहीं प्रभावशाली संस्थानों के मामलों में अलग रवैया अपनाया जाता है।
कानूनी पहलू की बात करें तो रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि क्लब की लीज में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जिनके तहत सरकार नोटिस देकर जमीन वापस ले सकती है। इसी संदर्भ में कुछ विशेषज्ञों और सामाजिक समूहों ने सुझाव दिया है कि इस भूमि का उपयोग सार्वजनिक पार्क, हरित क्षेत्र या जनहित की परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है।
हालांकि, इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार या क्लब प्रबंधन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
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