
कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विपक्ष के नेता और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि न तो टीएमसी की विधायक दल कांग्रेस में शामिल हो रही है और न ही पार्टी के सांसदों, नगर निकायों या पंचायतों के प्रतिनिधियों के बीच ऐसा कोई रुझान है।
‘विलय का सवाल ही नहीं उठता’
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, अभी संख्या 64 विधायकों की है। ये लोग आएंगे और विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपेंगे। कांग्रेस और टीएमसी के विलय की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “जहां तक हमारी विधायक दल की बात है, हम निश्चित रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। संसद में जो सांसद हैं, उनमें से दो-तिहाई से अधिक भी कांग्रेस में विलय नहीं हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन किसके साथ विलय कर रहा है?” उन्होंने दावा किया कि उनकी जानकारी के अनुसार न तो सांसद कांग्रेस में जा रहे हैं, न विधायक, न नगर पालिका के प्रतिनिधि, न जिला परिषद के सदस्य और न ही पंचायत प्रतिनिधि। बनर्जी ने कहा, “जब कोई भी कहीं नहीं जा रहा है तो विलय का सवाल ही नहीं उठता।”
ऋतब्रत बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में टीएमसी और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। उनके बयान को इन चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि वर्तमान में विधायकों की संख्या 64 है और यह बढ़ने की उम्मीद है।
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने इस्तीफों पर साधी चुप्पी
वहीं, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सुष्मिता देव के इस्तीफे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, उन्होंने सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे नेताओं के इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन लोगों पर सवाल उठाए हैं जो पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद वर्तमान में पार्टी से अलग राय रखते हैं या पार्टी के सही रास्ते पर न होने का विश्वास करते हैं, फिर भी अपनी सांसद की सीटें पकड़े हुए हैं।
घोष ने कहा, “अगर सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव, जिन्होंने ममता दीदी के उम्मीदवारों के तौर पर तृणमूल कांग्रेस के प्रतीक पर जीत हासिल की थी, इस्तीफा दे सकते हैं, तो आप बाकी लोग क्यों जारी रख रहे हैं? अगर आप पार्टी के साथ जुड़े नहीं हैं या मानते हैं कि यह सही रास्ते पर नहीं है, तो आप दूसरों को उपदेश देते हुए अपनी सांसद की सीटों पर क्यों बने हुए हैं?”
कांग्रेस-टीएमसी विलय की खबरों पर टिप्पणी से इनकार
कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित विलय की खबरों पर सवाल पूछे जाने पर कुणाल घोष ने कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने दिल्ली में हो रही बैठकों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहने की बात कही। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह इंडिया ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक थी, और दोनों पार्टियों के बीच आगे भी बैठकें संभव हैं और हो भी रही हैं। उन्होंने कहा, “हमारे नेता दिल्ली में हैं; पहले कुछ वास्तव में होने दें, और फिर हम देखेंगे। कुणाल घोष के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर इस्तीफों को लेकर कुछ असंतोष है। वहीं कांग्रेस के साथ संभावित विलय के मुद्दे पर फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया जा रहा है।
ममता-सोनिया मुलाकात के बाद बढ़ीं चर्चाएं
मंगलवार को टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच हुई मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच संभावित विलय की चर्चाओं को बल मिला था। यह मुलाकात उस तस्वीर के सामने आने के एक दिन बाद हुई, जिसमें इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान दोनों नेताओं को गले मिलते देखा गया था।
हालांकि, दोनों पक्षों ने इस मुलाकात के एजेंडे या चर्चा के विषयों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विपक्षी एकता को मजबूत करने और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए इंडिया गठबंधन के दलों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी से मिले अभिषेक बनर्जी
इसी बीच बुधवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात इस सप्ताह दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस और टीएमसी के बीच जारी राजनीतिक संवाद का हिस्सा मानी जा रही है।हालांकि, बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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