
नई दिल्ली । भारत (India) अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी जगहों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। देश में कई ऐसे गांव हैं, जिनकी खासियत लोगों को चौंका देती है। इन्हीं में से एक है महाराष्ट्र (Maharashtra) का शेतपाल गांव (Shetpal Village), जिसे ‘स्नेक विलेज ऑफ इंडिया’ यानी भारत का सांपों वाला गांव कहा जाता है।
आमतौर पर जहरीले सांपों, खासकर कोबरा का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। लेकिन शेतपाल गांव की तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां जहरीले कोबरा सांप इंसानों के बीच खुलेआम घूमते हैं, बच्चे उनके आसपास खेलते हैं और गांववाले बिना किसी भय के उनके साथ रहते हैं।
महाराष्ट्र स्थित इस गांव की पहचान इंसानों और सांपों के बीच बने अनोखे संबंध से है। गांव के लोग कोबरा को सिर्फ एक जीव नहीं, बल्कि नाग देवता का स्वरूप मानते हैं। यही कारण है कि यहां सांपों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया जाता और उनका विशेष सम्मान किया जाता है।
शेतपाल की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि लगभग हर घर में सांपों के रहने के लिए विशेष स्थान बनाया जाता है। गांववाले इसे शुभ मानते हैं और विश्वास करते हैं कि नाग देवता उनके घर और परिवार की रक्षा करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बचपन से ही लोग सांपों के साथ रहना सीखते हैं, जिसके कारण उनके मन में डर के बजाय सम्मान की भावना विकसित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सांपों को परेशान न किया जाए तो वे भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते।
नाग पंचमी के अवसर पर गांव में विशेष उत्सव का माहौल रहता है। इस दिन नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु तथा पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से लोग शेतपाल का रुख करते हैं।
आज शेतपाल गांव अपनी अनूठी संस्कृति और सांपों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा के कारण वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है। कई विदेशी पर्यटक, शोधकर्ता और डॉक्यूमेंट्री निर्माता भी इस गांव का दौरा कर चुके हैं। इंसानों और जहरीले सांपों के बीच का यह अनोखा तालमेल आज भी लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है।
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