नई दिल्ली। भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव बढ़ने की आशंका के बीच बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी (Bangladesh Jamaat-e-Islami) और उसके सहयोगी इस्लामी दलों ने सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन कथित भारतीय ‘पुश-इन’ यानी जबरन घुसपैठ और सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की मौतों के विरोध में आयोजित किए जाने की बात कही गई है। इसी बीच हसीना-विरोधी छात्र संगठन (NCP) ने सीमा पर रहने वाले नागरिकों से ‘ह्यूमन शील्ड’ बनने की अपील की है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नई दिल्ली में भारत और बांग्लादेश के बीच उच्चस्तरीय सीमा वार्ता जारी है। दोनों देशों के बीच करीब 4096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पहले से ही अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर संवेदनशील मानी जाती है।
11 दलों के गठबंधन का विरोध कार्यक्रम
ढाका में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन ने सीमा क्षेत्रों में आंदोलन की रूपरेखा पेश की। गठबंधन के समन्वयक और पार्टी के सहायक महासचिव AHM Hamidur Rahman Azad ने बताया कि 12 जून को सीमावर्ती जिलों और अहम बॉर्डर पॉइंट्स पर विरोध रैलियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 15 जून को राजधानी ढाका में बड़ा विरोध प्रदर्शन और रैली निकाली जाएगी।
गठबंधन में NCP के अलावा Bangladesh Khelafat Majlish, Khilafat Majlis और अन्य विपक्षी संगठन शामिल हैं। यह राजनीतिक गठबंधन आगामी आम चुनावों से पहले सक्रिय हुआ है।
‘ह्यूमन शील्ड’ बनाने की अपील
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान NCP के मुख्य समन्वयक Nasiruddin Patwari ने सीमावर्ती नागरिकों से ‘मानवीय ढाल’ बनने की अपील की। उनका कहना था कि जीरो लाइन के पास रहने वाले लोग संकट का सामना कर रहे हैं और सीमा सुरक्षा को मजबूत किया जाना चाहिए।
सीमा पर घटनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
जमात-ए-इस्लामी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में सीमा पर कथित घुसपैठ और हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। पार्टी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों को जबरन बांग्लादेश भेजने की कोशिश की गई, जबकि सीमा पर गोलीबारी में कई नागरिक प्रभावित हुए।
हालांकि भारत ने इन आरोपों को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत किसी को जबरन सीमा पार नहीं भेज रहा है। उनके मुताबिक, केवल कानूनी प्रक्रिया और राष्ट्रीयता सत्यापन के बाद ही अवैध विदेशी नागरिकों को द्विपक्षीय समझौतों के तहत वापस भेजा जाता है।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि West Bengal और Assam समेत कई राज्यों में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में सीमा पर प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम और राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंधों और सीमा हालात पर असर डाल सकती है।
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