इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) की आर्थिक चुनौतियों (Financial challenges) के बीच सरकार ने रक्षा क्षेत्र पर बड़ा दांव खेला है। वित्तीय दबाव और बढ़ती गरीबी के बावजूद पाकिस्तान ने वर्ष 2026-27 के लिए अपने रक्षा बजट में 17.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 3,000 अरब पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। पिछले वित्त वर्ष में रक्षा मद के लिए 2,550 अरब रुपये आवंटित किए गए थे।
इस्लामाबाद में नेशनल असेंबली में बजट पेश करते हुए Muhammad Aurangzeb ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि आगामी वित्त वर्ष के लिए कुल संघीय बजट 18,771 अरब पाकिस्तानी रुपये प्रस्तावित किया गया है, जबकि आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) का लक्ष्य चार प्रतिशत रखा गया है।
सरकारी खर्चों की बात करें तो सबसे बड़ा हिस्सा कर्ज और ब्याज भुगतान पर जाएगा। सरकार ने इसके लिए 8,054 अरब पाकिस्तानी रुपये निर्धारित किए हैं। वहीं पेंशन मद में 1,169 अरब रुपये, सब्सिडी के लिए 1,091 अरब रुपये और पब्लिक सेक्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (PSDP) के लिए 1,000 अरब पाकिस्तानी रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसी बीच पाकिस्तान की समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में भी एक अहम कदम सामने आया है। चीन के साथ समझौते के तहत तैयार की गई पाकिस्तान की पहली हंगोर-क्लास पनडुब्बी कराची बंदरगाह पहुंच गई है। यह परियोजना 2015 में हुए रक्षा समझौते का हिस्सा है, जिसके तहत कुल आठ डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियां तैयार की जानी हैं।
समझौते के मुताबिक शुरुआती चार पनडुब्बियों का निर्माण चीन की कंपनी द्वारा चीन में किया जा रहा है, जबकि बाकी चार का निर्माण तकनीकी हस्तांतरण के जरिए कराची शिपयार्ड में किया जाएगा। ‘हंगोर’ नाम बंगाली शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘शार्क’ होता है।
हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों को अत्यधिक शांत संचालन क्षमता के लिए जाना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इनकी डिजाइन ऐसी होती है कि दुश्मन के सोनार और निगरानी सिस्टम के लिए इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल माना जाता है।
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