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15 जून को दुर्लभ सोमवती अमावस्या संयोग, राशि के अनुसार अभिषेक से बढ़ेगा पुण्य और मिलेगा आध्यात्मिक लाभ

June 13, 2026

नई दिल्ली । सनातन परंपरा (Sanatan Tradition) में अमावस्या (Amavasya) तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) कहा जाता है। यह संयोग भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून को पड़ रही है, जिसके कारण श्रद्धालुओं (Devotees) के बीच इसका विशेष महत्व देखा जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करने पर व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई लोग इस दिन उपवास रखकर शिव मंदिरों में विशेष पूजा भी करते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं में राशि अनुसार शिवलिंग का अभिषेक करने को भी शुभ माना गया है। माना जाता है कि इससे ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव कम हो सकते हैं और व्यक्ति को मानसिक संतुलन तथा सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसी आधार पर विभिन्न राशियों के लिए अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा बताई जाती है।

मेष राशि के जातकों के लिए गंगाजल से अभिषेक करना शुभ माना गया है। वृषभ राशि के लोग गंगाजल में दूध मिलाकर अभिषेक कर सकते हैं। मिथुन राशि के जातकों के लिए दूध और दूर्वा का प्रयोग लाभकारी माना गया है, जबकि कर्क राशि के लोग दही से अभिषेक कर सकते हैं।

सिंह राशि के जातकों को गंगाजल में लाल पुष्प डालकर अभिषेक करने की सलाह दी जाती है। कन्या राशि के लोग गंगाजल और दूर्वा का उपयोग कर सकते हैं। तुला राशि के लिए पंचामृत से अभिषेक शुभ माना गया है, जबकि वृश्चिक राशि के जातकों को दूध और शहद से अभिषेक करने की परंपरा बताई गई है।

धनु राशि के लोग दूध में केसर मिलाकर अभिषेक कर सकते हैं। मकर राशि के लिए गंगाजल में काले तिल डालकर अभिषेक करना शुभ माना जाता है। कुंभ राशि के जातकों को नारियल जल से तथा मीन राशि के लोगों को गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने की सलाह दी जाती है।


  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, दान-पुण्य तथा पितरों का स्मरण विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा मंगलकामना के लिए प्रार्थना करते हैं। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था है और इन्हें श्रद्धा एवं विश्वास के परिप्रेक्ष्य में ही देखा जाता है।

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