
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में हालिया शांति समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में हलचल फिर से सामान्य होती दिख रही है। इसी बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। शिपिंग कॉरिडोर (Shipping corridor) से सबसे पहले सुरक्षित निकलने वाला कमर्शियल जहाज भारतीय LNG टैंकर ‘दिशा’ बना है, जो कतर से 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, यह जहाज लंबे समय से फारस की खाड़ी में संघर्ष के चलते फंसा हुआ था। अमेरिकी और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के कुछ घंटों बाद ही होर्मुज क्षेत्र में आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी, जिसके बाद ‘दिशा’ ने इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार किया।
लगातार ऑन रहा AIS सिस्टम, सुरक्षित तरीके से पार किया रास्ता
सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) द्वारा संचालित यह LNG टैंकर माल्टा के झंडे के साथ चल रहा है। शिपिंग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने पुष्टि की है कि जहाज ने सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है। खास बात यह रही कि जहां पिछले कई हफ्तों से कई जहाज सुरक्षा कारणों से अपने ट्रांसपोंडर (AIS) बंद कर रहे थे, वहीं भारतीय जहाज ‘दिशा’ ने लगातार अपनी लाइव लोकेशन ऑन रखी और बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ता रहा।
18 जून को दहेज बंदरगाह पहुंचेगा जहाज
रिपोर्ट के अनुसार, यह LNG टैंकर 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पर पहुंचेगा। इससे देश में गैस आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि यह जहाज पिछले तीन महीनों से युद्ध जैसी स्थिति के कारण खाड़ी क्षेत्र में रुका हुआ था।
होर्मुज से गुजरना बना था चुनौती
जानकारी के अनुसार, इस मार्ग पर पहले भी तनावपूर्ण घटनाएं हो चुकी हैं। 18 अप्रैल को हालात और गंभीर हो गए थे, जब इस समुद्री रास्ते पर सुरक्षा स्थिति बिगड़ने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ समय के लिए व्यापारिक गतिविधियां बाधित रहीं।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक इस मार्ग पर निर्भर है। देश अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 90% पश्चिम एशिया और इसी रूट के जरिए आयात करता है। इसके अलावा लगभग 60% LNG (प्राकृतिक गैस) और करीब 40% कच्चा तेल भी इसी समुद्री मार्ग से भारत आता है। इसलिए इस रूट में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है।
अभी भी 13 भारतीय जहाज फंसे
‘दिशा’ के सुरक्षित निकलने के बावजूद फारस की खाड़ी में अभी भी 13 भारतीय वाणिज्यिक जहाज फंसे हुए हैं। मार्च से अब तक केवल 10 भारतीय जहाज ही इस मार्ग को पार कर पाए हैं।
शिपिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही शांति समझौते की घोषणा हो चुकी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अभी सतर्क रुख अपना रही हैं। स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है, क्योंकि समुद्री सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत सरकार का कहना है कि जैसे ही यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होगा, खाड़ी में फंसे बाकी जहाजों को भी चरणबद्ध तरीके से वापस लाया जाएगा।
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