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मानसून की देरी से मुंबई में गहराया जलसंकट, झीलों में बचा सिर्फ 10-12% पानी, CM ने बुलाई आपात बैठक

June 16, 2026

मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और इसके आस-पास के इलाकों में पेयजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। मानसून के आगमन में हो रही देरी के कारण स्थिति चिंताजनक हो गई है और महानगर को पानी की आपूर्ति करने वाली सात प्रमुख झीलों का जलस्तर घटकर महज 10 से 12 प्रतिशत पर आ गया है।

आसमान से बरसने वाली राहत में देरी को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आपातकालीन समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में मुंबई और एमएमआर (मुंबई महानगर क्षेत्र) में अगस्त 2027 तक के लिए जलापूर्ति का पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किया जाए।

पानी के लिए 7 झीलों पर निर्भर है मुंबई
मुंबई की करीब दो करोड़ की आबादी की प्यास बुझाने का मुख्य जिम्मा अपर वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी जैसी सात झीलों पर निर्भर है। वर्तमान में इन जलाशयों का कुल उपयोगी जल स्टॉक अपनी क्षमता का एक बहुत छोटा हिस्सा ही बचा है।


  • मुंबई में 10% पानी की कटौती लागू
    बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पहले ही पूरे शहर में 10 फीसदी पानी की कटौती लागू कर चुका है। इस संकट का असर केवल झुग्गियों या मध्यमवर्गीय इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ली और मलाबार हिल जैसे वीआईपी इलाकों के गगनचुंबी भवनों में रहने वाले लोग भी पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।

    मानसून में देरी से बढ़ी चिंता
    जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश न होने की वजह से बीएमसी प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। बिगड़ते हालातों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जल संसाधन विभाग और स्थानीय नगर निकायों को दूरदर्शी योजना पर काम करने को कहा है।

    सरकार ने साफ किया है कि अल-नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंका के मद्देनजर केवल इस साल की नहीं, बल्कि अगले साल यानी अगस्त 2027 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर पानी का कोटा आरक्षित किया जाए। बांधों और प्रमुख जलाशयों से केवल पीने के पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। गैर-जरूरी या सिंचाई कार्यों के लिए पानी के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां लगाई जा रही हैं।

    पारंपरिक और प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रशासन की नजर
    इस अभूतपूर्व जलसंकट से निपटने के लिए अब प्रशासन ने पारंपरिक और प्राकृतिक जल स्रोतों की ओर रुख किया है। मुंबई, नई मुंबई और ठाणे क्षेत्र में स्थित सैकड़ों पुराने और पारंपरिक कुओं को पुनर्जीवित करने के प्रयास युद्ध स्तर पर शुरू कर दिए गए हैं। बीएमसी ने अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले लगभग 350 पुराने खुले कुओं और बावड़ियों की सफाई, गाद निकालने और उनके पानी को शुद्ध करने की योजना बनाई है।

    इस पानी का उपयोग गैर-पेयजल कार्यों (जैसे साफ-सफाई और बागवानी) के लिए किया जाएगा, ताकि झीलों से आने वाले शुद्ध पेयजल पर दबाव को कम किया जा सके। ठाणे और नई मुंबई नगर निगमों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में भूजल स्तर को बढ़ाने और स्थानीय कुओं को एक्टिव करने के लिए वार्ड स्तर पर टीमों का गठन किया है।

    गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं पारंपरिक कुएं
    अधिकारियों का मानना है कि मानसून के सक्रिय होने तक ये पारंपरिक कुएं टैंकर माफियाओं पर निर्भरता कम करने में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और बीएमसी ने आम नागरिकों से भी पानी का बेहद विवेकपूर्ण और सीमित इस्तेमाल करने की भावुक अपील की है।

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