
जबलपुर। न्याय की उम्मीद लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते लोगों की कहानियां अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन मंगलवार को जबलपुर कलेक्ट्रेट में जो दृश्य सामने आया, उसने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए। घमापुर थाना क्षेत्र के शीतलामाई इलाके की रहने वाली एक महिला अपनी बेटी के साथ जनसुनवाई में पहुंची और कथित रूप से पुलिस की अनदेखी तथा दबंगों की धमकियों से परेशान होकर कलेक्टर के सामने न्याय की गुहार लगाने लगी।
मामला उस समय भावुक मोड़ पर पहुंच गया जब महिला कलेक्ट्रेट परिसर में ही कलेक्टर के पैरों के सामने लेट गई और हाथ जोड़कर अपनी परिवार की सुरक्षा तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगी। इस दौरान उसकी बेटी भी फूट-फूटकर रोने लगी। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों के लिए यह दृश्य बेहद मार्मिक था।
वर्षों से हैं परेशान
पीडि़त महिला ने प्रशासन को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से उसका परिवार लगातार प्रताडऩा और धमकियों का सामना कर रहा है। महिला के अनुसार क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। कई बार विवाद, धमकी और मारपीट की घटनाएं सामने आने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुरक्षा और न्याय नहीं मिला।महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष द्वारा केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है।
बेटी ने सुनाई दर्दभरी दास्तां
इस दौरान पीडि़त महिला की बेटी ने भी अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की। भावुक होते हुए उसने कहा कि वह पढ़-लिखकर पुलिस अधिकारी बनना चाहती है और समाज की सेवा करना चाहती है, लेकिन वर्तमान हालात ऐसे हैं कि घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है।बेटी ने आरोप लगाया कि परिवार के साथ लगातार अभद्रता, धमकी और हिंसा की घटनाएं होती रही हैं, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ है।
पति अस्पताल में भर्ती
महिला ने बताया कि 14 जून को हुए एक विवाद के दौरान उसके पति के साथ कथित रूप से लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। वर्तमान में उनका उपचार अस्पताल में चल रहा है। महिला का कहना है कि इस घटना के बाद परिवार और अधिक दहशत में है।
कलेक्टर ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। कलेक्टर ने घमापुर थाना प्रभारी से फोन पर चर्चा कर मामले में आवश्यक कार्रवाई और पीडि़त परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पुलिस पर उठे सवाल
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि कोई पीडि़त परिवार शिकायत लेकर थाने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी खुद को असुरक्षित महसूस करता है, तो उसे न्याय के लिए किस दरवाजे पर जाना चाहिए। कलेक्ट्रेट में सामने आया यह दृश्य व्यवस्था से उम्मीद और निराशा के बीच झूल रहे आम की व्यथा है।
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