
शिमला । मुख्यमंत्री सुखविंदरसिंह सुक्खु (Chief Minister Sukhvinder Singh Sukkhu) ने कहा कि केंद्र सरकार (Central Government) वर्षों से लंबित ऊर्जा बकाये का शीघ्र भुगतान करे (Should promptly clear long-pending Energy Dues) ।
मुख्यमंत्री सुखविंदरसिंह सुक्खु ने केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास तथा शहरी कार्य मंत्री मनोहरलाल खट्टर से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य को मिलने वाली मुफ्त बिजली रॉयल्टी में वृद्धि तथा वर्षों से लंबित ऊर्जा बकाया के शीघ्र भुगतान का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा संचालित उन जलविद्युत परियोजनाओं में, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक 12 वर्ष की अवधि पूरी कर ली है, वर्तमान 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से 180 मेगावाट क्षमता वाली बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके संचालन के 44 वर्ष पूरे हो चुके हैं, इसलिए राज्य की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जानी चाहिए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं से संबंधित ऊर्जा बकाया के भुगतान में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश के हजारों लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा और राज्य को पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, राज्य को उसका उचित ऊर्जा बकाया अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पंजाब और हरियाणा की सहमति लेकर 31 अक्टूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद 6 प्रतिशत ब्याज सहित राज्य को भुगतान सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि इस बकाया का भुगतान नकद राशि के रूप में किया जाता है, तो चक्रवृद्धि ब्याज सहित इसकी अनुमानित राशि लगभग 7,784 करोड़ रुपये बनती है।
मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकार का पक्ष भी केंद्र सरकार के समक्ष रखा। इसके अलावा उन्होंने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की मांग करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं प्रदेश में निवेश, पर्यटन, रोजगार और सुनियोजित शहरी विकास को नई गति देंगी। शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार 24 शहरी निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित कर रही है, जिनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव’ के तहत 12.33 करोड़ रुपये तथा अमृत योजना की लंबित 64.45 करोड़ रुपये की राशि जारी करने का अनुरोध भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी निकायों में प्रत्येक संपत्ति की डिजिटल पहचान सुनिश्चित करने के लिए क्यूआर-आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली लागू की जा रही है। इस परियोजना के दूसरे चरण के सफल संचालन हेतु उन्होंने आगामी पांच वर्षों के लिए 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की। बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित रहे।
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