
नई दिल्ली। अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर जिस MoU पर दोनों देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, उसका विस्तृत विवरण अब सामने आ गया है। इसे अमेरिकी पक्ष की ओर से जारी किया गया है। इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने, ईरान पर लगी कुछ आर्थिक पाबंदियों में ढील देने और परमाणु मुद्दे पर आगे बातचीत करने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।
इस MoU में कुल 14 पॉइंट हैं, जिनमें 5वां पॉइंट सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर किसी तरह का टोल नहीं लगाया जाएगा, हालांकि भविष्य में टोल व्यवस्था की संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया गया है।
क्या है 5वें पॉइंट में?
MoU के 5वें पॉइंट के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ईरान यह सुनिश्चित करेगा कि फारस की खाड़ी से ओमान सागर और वापस आने वाले कमर्शियल जहाज अगले 60 दिनों तक बिना किसी टोल के सुरक्षित रूप से आवाजाही कर सकें।
इसमें यह भी कहा गया है कि जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू होगी, लेकिन रास्ते में मौजूद तकनीकी बाधाओं और बारूदी सुरंगों को हटाने में ईरान को लगभग 30 दिन का समय लग सकता है।
आगे इस पॉइंट में यह भी उल्लेख है कि होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रबंधन को लेकर ईरान ओमान के साथ बातचीत करेगा। साथ ही फारस की खाड़ी से जुड़े अन्य देशों के साथ भी चर्चा की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून और तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी।
इसका मतलब क्या है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। हालिया संघर्ष के दौरान इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी।
MoU के 5वें पॉइंट का मतलब यह निकाला जा रहा है कि अगले 30 दिनों में समुद्री मार्ग से अवरोध हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि 60 दिनों तक टोल-मुक्त आवागमन सुनिश्चित रहेगा। इसके बाद ओमान और अन्य तटीय देशों के साथ मिलकर एक स्थायी प्रबंधन व्यवस्था तय की जा सकती है, जिसमें भविष्य में टोल व्यवस्था लागू होने की संभावना भी बनी रहती है।
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