
नई दिल्ली। भारत में पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान, तेज और सुलभ हो गई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वार्षिक क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी सम्मेलन में कहा कि आज पासपोर्ट सेवा पूरी तरह लोकतांत्रिक हो चुकी है और यह विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण इंजन का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले पासपोर्ट बनवाना एक विशेष सुविधा माना जाता था, लेकिन अब यह आम नागरिकों तक आसानी से पहुंच चुका है। यही वजह है कि देश में पासपोर्ट की मांग लगातार बढ़ रही है।
जयशंकर ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 138 लाख से अधिक पासपोर्ट जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा भारतीयों की बढ़ती आकांक्षाओं और वैश्विक स्तर पर अवसरों की तलाश को दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूरोप दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया भर में भारतीय प्रतिभा की मांग तेजी से बढ़ रही है। जी7 देशों, फ्रांस और स्लोवाकिया जैसे देशों में भारतीय युवाओं और पेशेवरों की क्षमता को काफी सम्मान मिल रहा है। ऐसे में पासपोर्ट भारतीयों के लिए वैश्विक अवसरों का द्वार बनता जा रहा है।
सम्मेलन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में देश में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 545 से अधिक हो गई है। इसके अलावा 454 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र भी काम कर रहे हैं। इससे छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों के लोगों को भी पासपोर्ट सेवाओं का लाभ मिल रहा है। सरकार का दावा है कि इससे आवेदन प्रक्रिया तेज हुई है और नागरिकों को कम समय में पासपोर्ट उपलब्ध हो रहा है।
जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति ने देश को विश्व बंधु के रूप में स्थापित किया है। इसका असर भारतीय पासपोर्ट की साख पर भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय पासपोर्ट को दुनिया के कई देशों में सम्मान और भरोसे के साथ देखा जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में पासपोर्ट सेवा और बेहतर होगी तथा यह भारत को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत और जुड़ा हुआ राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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