वॉशिंगटन/रोम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Georgia Meloni) के रिश्तों को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। दोनों नेताओं के बीच उस समय विवाद गहरा गया जब ट्रंप ने दावा किया कि G7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए उत्सुक थीं। इस बयान पर इटली की प्रधानमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न तो वह और न ही उनका देश कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाता है।
ट्रंप के बयान के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई। विवाद इतना बढ़ा कि इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया, जिससे दोनों देशों के संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
विश्लेषकों का कहना है कि कुछ समय पहले तक ट्रंप और मेलोनी के संबंध बेहद सौहार्दपूर्ण माने जाते थे। वर्ष 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली मेलोनी एकमात्र प्रमुख यूरोपीय नेता थीं। उस समय दोनों नेताओं की वैचारिक समानताओं और राजनीतिक निकटता की काफी चर्चा हुई थी।
हालांकि, पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बाद दोनों नेताओं के रुख में अंतर दिखाई देने लगा।
फ्रांस में आयोजित G7 सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच बातचीत और सार्वजनिक मुलाकातों को देखकर माना जा रहा था कि पुराने मतभेद कम हो गए हैं। लेकिन ट्रंप के हालिया बयान ने इस धारणा को झटका दिया।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मेलोनी ने कहा कि यह पूरी तरह मनगढ़ंत कहानी है और वास्तविकता से इसका कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि इटली अपनी गरिमा और सम्मान के साथ खड़ा रहने वाला देश है और किसी के सामने झुकने की परंपरा नहीं रखता।
मेलोनी की प्रतिक्रिया को इटली के राजनीतिक वर्ग में व्यापक समर्थन मिला है। कई दलों और नेताओं ने ट्रंप की टिप्पणी को इटली के सम्मान से जोड़कर देखा और प्रधानमंत्री के जवाब का स्वागत किया।
विपक्षी नेताओं ने भी इस विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि यह घटनाक्रम उन उम्मीदों पर सवाल खड़े करता है, जिनके तहत मेलोनी ने ट्रंप प्रशासन के साथ विशेष संबंध विकसित करने की कोशिश की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया की स्थिति भी है। ईरान से जुड़े संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर इटली और अमेरिका के दृष्टिकोण में अंतर दिखाई दिया है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इटली ने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर भी सावधानीपूर्ण रुख अपनाया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं ने ट्रंप और मेलोनी के व्यक्तिगत संबंधों को भी प्रभावित किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेलोनी अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी हैं। उन्हें तय करना होगा कि अमेरिका के साथ नरम कूटनीतिक रवैया जारी रखा जाए या फिर यूरोप के कुछ अन्य देशों की तरह अधिक स्वतंत्र और सख्त रुख अपनाया जाए।
फिलहाल दोनों नेताओं की ओर से कोई औपचारिक कूटनीतिक टकराव सामने नहीं आया है, लेकिन हालिया बयानबाजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि पहले जैसी राजनीतिक गर्मजोशी अब दिखाई नहीं दे रही। आने वाले महीनों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में जाते हैं, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।
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