
नई दिल्ली। हिमालय (Himalayas) को लंबे समय से स्वच्छ और जीवनदायी हवा का पर्याय माना जाता रहा है, लेकिन अब यह धारणा चुनौती के दौर से गुजर रही है। उत्तराखंड (Uttarakhand) के सीमांत पर्वतीय क्षेत्र मुनस्यारी में किए गए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि मानव गतिविधियों (Human activities) से पैदा होने वाला प्रदूषण (Pollution) अब उन ऊंचाई वाले इलाकों तक भी पहुंच रहा है जिन्हें अब तक अपेक्षाकृत प्रदूषण-मुक्त माना जाता था।
अध्ययन में हवा में बेंजीन सहित कई हानिकारक रसायनों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (एरीज) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित शोध पत्रिका एनवायरनमेंटल साइंस एंड पॉल्यूशन रिसर्च (Environmental Science and Pollution Research) में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल प्रदूषण का स्तर महानगरों की तुलना में काफी कम है और तत्काल स्वास्थ्य जोखिम सीमित हैं, पर यह स्थिति भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। अध्ययन के तहत वर्ष 2022-23 के दौरान मुनस्यारी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता की पूरे एक वर्ष तक निगरानी की गई।
मौसम के साथ बदलता रहा प्रदूषण
अध्ययन में यह भी पाया गया कि मुनस्यारी में प्रदूषण का स्तर मौसम के अनुसार बदलता है। सर्दियों और मानसून के दौरान हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है, जबकि बसंत और पतझड़ के मौसम में हानिकारक गैसों की मात्रा बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव मुनस्यारी जैसे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार, वाहनों की बढ़ती आवाजाही, निर्माण कार्यों और ऊर्जा के लिए एलपीजी तथा डीजल के उपयोग ने वायु गुणवत्ता पर दबाव बढ़ाया है।
ओजोन और सूक्ष्म कणों के निर्माण में योगदान
शोध में बेंजीन और जाइलीन जैसे सुगंधित हाइड्रोकार्बनों की महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार ये रसायन वातावरण में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करते हैं, जिससे सतही ओजोन और सेकेंडरी एरोसोल्स जैसे प्रदूषकों का निर्माण बढ़ता है। ओजोन और सूक्ष्म कणों का बढ़ता स्तर केवल वायु प्रदूषण का संकेत नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
हवा में बेंजीन को लेकर सबसे अधिक चिंता
अध्ययन में सबसे अधिक चिंता बेंजीन की मौजूदगी को लेकर जताई गई है। बेंजीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैंसरकारी रसायन माना जाता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से रक्त संबंधी कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में मुनस्यारी में दर्ज स्तर दिल्ली, हल्द्वानी जैसे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम हैं और तत्काल स्वास्थ्य संकट जैसी स्थिति नहीं है। इसके बावजूद लगातार बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यदि समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है।
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