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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: ऑडिट फर्म ने 2020 में ही दी थी चेतावनी, सुझावों पर अमल न होने से उठे सवाल

June 25, 2026

अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर उठे विवाद के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) को वर्ष 2020 में ही एक निजी ऑडिट फर्म ने वित्तीय प्रबंधन और दान व्यवस्था में संभावित जोखिमों के प्रति आगाह किया था। फर्म ने स्पष्ट रूप से मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने और जवाबदेही तय करने की सिफारिश की थी, लेकिन इन सुझावों पर प्रभावी अमल नहीं किया गया।

जानकारों का मानना है कि यदि उस समय वित्तीय लेन-देन, दान प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था के लिए स्पष्ट एसओपी लागू कर दी जाती, तो नकदी और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ती तथा कथित अनियमितताओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती थी।

ट्रस्ट गठन के कुछ माह बाद दी गई थी सलाह

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद 5 फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। इसके लगभग नौ महीने बाद नवंबर 2020 में एक निजी ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट की वित्तीय और डेटा प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कर आंतरिक ऑडिट एवं रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी सलाह दी थी।

फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कई कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि दान से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संधारित नहीं किए जा रहे हैं और लेन-देन की निगरानी के लिए पर्याप्त नियंत्रण तंत्र मौजूद नहीं है। फर्म ने सुझाव दिया था कि स्पष्ट एसओपी और जवाबदेही आधारित व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय हो सके।

दान प्रबंधन को लेकर जताई थी चिंता

रिपोर्ट में विशेष रूप से दान स्वरूप प्राप्त नकदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। फर्म ने सुझाव दिया था कि चढ़ावे में प्राप्त वस्तुओं का विस्तृत स्टॉक रजिस्टर तैयार किया जाए और उनके रखरखाव तथा लेखांकन की मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।

इसके अलावा बैंक खातों के नियमित मिलान, अकाउंटिंग डेटा की समयबद्ध एंट्री और प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि डेटा प्रबंधन की कमी और गैर-पेशेवर प्रक्रियाएं भविष्य में भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा कर सकती हैं।



  • 1500 कर्मचारियों के बावजूद एचआर व्यवस्था नहीं

    ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना पर भी सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत होने के बावजूद मानव संसाधन (HR) प्रबंधन की समुचित व्यवस्था नहीं थी। फर्म ने योग्य कर्मियों की नियुक्ति, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने और तकनीकी सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की सलाह दी थी।

    सूत्रों का कहना है कि यदि इन सुझावों को समय रहते लागू किया गया होता तो दान से संबंधित रिकॉर्ड और संपत्तियों का प्रबंधन अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकता था।

    4,500 करोड़ रुपये से अधिक दान का दावा

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ट्रस्ट के गठन के बाद नवंबर 2025 तक मंदिर को 4,575 करोड़ रुपये से अधिक नकद दान प्राप्त होने का दावा किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रस्ट की वेबसाइट पर न तो इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और न ही एसओपी संबंधी कोई विस्तृत जानकारी साझा की गई है।

    विहिप ने भी मांगी पुलिस जांच

    इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि मामले को केवल आंतरिक जांच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यदि प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत हैं तो एफआईआर दर्ज कर नियमित पुलिस जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्य सामने आ सकें और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।

    फिलहाल यह मामला धार्मिक आस्था, वित्तीय पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और ट्रस्ट प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या कदम उठाता है।

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