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पूजा में दीया जलाने की सही विधि जान लें, एक छोटी गलती भी बिगाड़ सकती है शुभ फल

June 25, 2026

नई दिल्ली। सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में दीपक को केवल प्रकाश का साधन नहीं बल्कि शुभता, सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) और ईश्वरीय कृपा (Divine Grace) का प्रतीक माना गया है। किसी भी देवी-देवता की पूजा (Worship of gods and goddesses) दीप प्रज्वलित(Lighting the lamp)  किए बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। यही कारण है कि घर के मंदिर से लेकर बड़े धार्मिक स्थलों तक पूजा के समय दीपक जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि दीपक जलाने से जुड़े कुछ विशेष नियम और विधियां हैं जिनका पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार दिन में दो बार दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पहला दीपक सूर्योदय के समय और दूसरा संध्या काल यानी सूर्यास्त के बाद जलाया जाता है। सुबह लगभग 5 बजे से 7 बजे के बीच और शाम को 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच दीपक जलाना श्रेष्ठ माना जाता है। मौसम और स्थान के अनुसार इस समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है। विशेष रूप से संध्या के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से माता लक्ष्मी का घर में आगमन माना जाता है।

दीपक जलाने के लिए मिट्टी, पीतल या तांबे के दीपक का उपयोग करना शुभ माना जाता है। पूजा से पहले दीपक को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। यदि मिट्टी का दीपक हो तो उसे कुछ समय पानी में भिगोकर सुखाने के बाद प्रयोग करना बेहतर माना जाता है। दीपक में गाय का घी, तिल का तेल या सरसों का तेल डाला जा सकता है। इसके बाद रुई की बाती को घी या तेल में अच्छी तरह भिगोकर दीपक में स्थापित करना चाहिए।

ध्यान रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा में कभी भी टूटा, फूटा या गंदा दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा एक जलते हुए दीपक से दूसरा दीपक जलाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल होना चाहिए ताकि पूजा के दौरान उसकी लौ बीच में न बुझे।

दीपक जलाते समय मंत्रोच्चार का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि मंत्रों के साथ दीपक प्रज्वलित करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। दीपक जलाते समय यह मंत्र बोला जा सकता है—

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

यह मंत्र जीवन में सुख, स्वास्थ्य, धन और शत्रुओं से रक्षा की कामना के लिए बोला जाता है।


  • दीपक की दिशा भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। यदि तेल का दीपक जलाया जा रहा है तो उसे भगवान की बाईं ओर रखना चाहिए जबकि घी का दीपक भगवान की दाईं ओर रखना शुभ माना जाता है। दीपक की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। पूर्व दिशा में रखा दीपक आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है जबकि उत्तर दिशा में रखा दीपक धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। दक्षिण दिशा यम और पितरों की दिशा मानी जाती है इसलिए सामान्य पूजा में इस दिशा में दीपक रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही समय, सही दिशा और सही विधि से जलाया गया दीपक घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसलिए पूजा करते समय दीपक से जुड़े इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।

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