
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के दिन बड़ी संख्या में लोग पतंगें उड़ाते हैं. 15 अगस्त को पतंगें उड़ाना दिल्ली-एनसीआर की एक लोकप्रिय है पंररा मानी जाती है, जो सालों से चली आ रही है. 15 अगस्त के आसपास जब पतंगबाजी जोर पकड़ती है, तो एलिवेटेड मेट्रो लाइनों के पास पतंग की डोर के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) तारों से उलझने या चलती ट्रेन के पैंटोग्राफ (ओवरहेड इक्विपमेंट से बिजली लेने वाला उपकरण) में फंसने की संभवना रहती है.
ऐसी घटनाओं से न सिर्फ मेट्रो सेवाएं बाधित हो सकती हैं, बल्कि पतंग के मांझा जानलेवा भी साबित हो सकता है, इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने 15 अगस्त से पहले आम जनता से अपील की है. डीएमआरसी ने अपील करते हुए कहा है कि आम लोग डीएमआरसी का सहयोग करें.
डीएमआरसी अपील कि है कि रिहायशी इलाकों से गुजरने वाली एलिवेटेड मेट्रो लाइनों के पास पतंग न उड़ाएं. क्योंकि 25,000 वोल्ट वाले ओवरहेड इक्विपमेंट के सीधे या अप्रत्यक्ष संपर्क में आने से जान जा सकती है. साथ ही ओवरहेड इक्विपमेंट ट्रिप हो सकता है या मेट्रो ट्रेन/पैंटोग्राफ को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सेवा में रुकावट आ सकती है. सभी मेट्रो लाइनों से दूर खुली जगहों पर पतंग उड़ाने का आनंद लें, ताकि सभी यात्रियों की सुरक्षा और मेट्रो सेवाए बिना रुकावट चलती रहें.
हालांकि, डीएमआरसी के पास पास ऐसी रुकावटों को कम करने के लिए एक मजबूत सिस्टम है. पतंगों से जुड़ी घटनाओं से निपटने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं, ताकि पतंग की डोर दिखने पर उन्हें तुरंत हटाया जा सके. साथ ही, ट्रेन ऑपरेटरों और स्टेशन स्टाफ को इन दिनों पतंग की डोर पर नजर रखने और ज्यादा सावधान रहने को कहा गया है.
बता दें कि अभी दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो का 416 किलोमीटर का नेटवर्क है. इसमें रोजाना यात्रियों की सेवा के लिए ट्रेनों को बिजली देने के लिए 25,000 वोल्ट वाले ओवरहेड इक्विपमेंट तार लगे हैं.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved