संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के एक कार्यक्रम में आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन के मुद्दे पर पाकिस्तान (Pakistan) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिशें इस बात का संकेत हैं कि कुछ देश जांच और जवाबदेही से बचना चाहते हैं। भारत ने ऐसे देशों से आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने ‘बदलते खतरों और उभरती प्रौद्योगिकी के दौर में आतंकी वित्तपोषण से निपटने के साझा प्रयास’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि FATF आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ वैश्विक ढांचे का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने कहा कि FATF का मूल्यांकन तकनीकी तथ्यों, साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर किया जाता है। ऐसे में इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाना वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि जांच से बचने की मानसिकता को दर्शाता है।
भारत की ओर से कहा गया कि देश कई दशकों से सीमापार आतंकवाद का सामना कर रहा है और आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी कार्रवाई वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
हरीश ने कहा कि जिन देशों के FATF मूल्यांकन में कमियां सामने आई हैं, उन्हें राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय अपनी वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना चाहिए और आतंकवाद से जुड़े आर्थिक नेटवर्क के खिलाफ ठोस तथा स्थायी कार्रवाई करनी चाहिए।
भारत ने कहा कि FATF की जांच या मूल्यांकन का जवाब संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक अभियान चलाकर नहीं, बल्कि निर्धारित मानकों का पालन करके दिया जाना चाहिए। उन्होंने वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने, घरेलू कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत ने अपने संबोधन में कहा कि जो देश अपनी जमीन, संस्थानों या वित्तीय तंत्र का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए होने देते हैं, उन्हें ऐसी गतिविधियां रोकनी चाहिए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करना चाहिए।
गौरतलब है कि पाकिस्तान वर्ष 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था। बाद में आवश्यक सुधारों के दावों और मूल्यांकन के आधार पर उसे वर्ष 2022 में इस सूची से बाहर कर दिया गया था। भारत ने अपने संबोधन में संकेत दिया कि आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक प्रतिबद्धता केवल बयानों से नहीं, बल्कि प्रभावी और पारदर्शी कार्रवाई से साबित होती है।
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