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सहकारी संघवाद का एक मॉडल है वीबी जी राम जी योजना – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

July 02, 2026


ब्यावर/जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) ने कहा कि वीबी जी राम जी योजना (VB G Ramji Scheme) सहकारी संघवाद का एक मॉडल है (Is a model of Cooperative Federalism) ।


  • मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी जी राम जी योजना को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता ये है कि यह एक सहकारी संघवाद का मॉडल है। राजस्थान की डबल इंजन सरकार द्वारा इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 12 हजार 636 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जोकि राज्य में इस योजना का अब तक का सबसे अधिक बजट है। इससे गांवों में पानी और सड़कों जैसे स्थायी काम होंगे, जिनकी वास्तव में आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाली इस दूरदर्शी पहल का नेतृत्व किया है। यह योजना ग्रामीण रोजगार की मजबूत गारंटी और विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बनेगी। उन्होंने कहा कि देवमाली गांव की देश-दुनिया में एक खास पहचान है। इस गांव को भारत सरकार ने बेस्ट टूरिस्ट विलेज का पुरस्कार भी दिया है। आज भी इस गांव में पक्का घर नहीं बनाया जाता तथा ताले नहीं लगाए जाते।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीबी जी राम जी योजना के राज्य स्तरीय जन सम्मेलन सह शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गांवों की समृद्धि और विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन में वीबी जी राम जी योजना लाई गई है। प्रधानमंत्री का स्पष्ट विश्वास है कि गांवों को विकसित बनाकर ही भारत को विकसित बनाया जा सकता है। किसान की समृद्धि, श्रमिक के सम्मान और गांव की आत्मनिर्भरता से भारत विश्व की अग्रणी शक्ति बनेगा। यह योजना रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण, आधारभूत संरचना और ग्राम विकास का समग्र राष्ट्रीय अभियान है।

    उन्होंने कहा कि मनरेगा को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के लिए लाया गया था, लेकिन यह अपने मकसद में पूर्ण सफल नहीं हो पाया। मनरेगा के तहत अधिकांश काम में अस्थायी सड़कों, आधी-अधूरी जल संरचनाओं या बिना योजना के मिट्टी खुदाई जैसे कार्य होते थे, जिनका लंबी अवधि में कोई लाभ नहीं होता था। उन्होंने कहा कि जांच-पड़ताल की सुदृढ़ व्यवस्था नहीं होने से नकली और डुप्लीकेट जॉब कार्ड, फर्जी लाभार्थी, बढ़ा-चढ़ाकर या मनगढ़ंत हाजिरी रजिस्टर और श्रमिकों को आंशिक भुगतान या पूरी मजदूरी न देने जैसी गड़बड़ियां होती थी। साथ ही, सोशल ऑडिट केवल औपचारिकता के लिए होता था या होता ही नहीं था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत प्रशासनिक कार्यों के लिए केवल 6 प्रतिशत खर्च की अनुमति होने से योजना का बेहतर क्रियान्वयन संभव नहीं हो पाया। मनरेगा के काम खेती के सीजन में भी चलने के कारण किसानों को मजदूर नहीं मिल पाते थे और देरी से मजदूरी भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान केवल कागजी बनकर रह गए थे। उन्होंने कहा कि अब वीबी जी राम जी योजना में सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। फसल बुवाई और कटाई के समय श्रमिकों की कमी न हो इसके लिए राज्य सरकार 60 दिनों का कार्य विराम घोषित कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका और आपदाओं से निपटने संबंधी ठोस कार्य करवाए जा सकेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेज, मोबाइल ऐप और एआई जैसी तकनीकों का उपयोग कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। हर छह महीने में कार्यों का डिजिटल तथ्यों के साथ सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा। साथ ही, डिजिटल बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली की व्यवस्था की गई है, जिसमें निश्चित समय सीमा और जिला लोकपालों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हर हफ्ते भुगतान करना अनिवार्य होगा। दो सप्ताह से अधिक की देरी पर स्वतः ही मुआवजा मिलेगा। वहीं, प्रशासनिक व्यय की सीमा को बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है ताकि जमीनी स्तर पर पर्याप्त कर्मचारी, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशिक्षण और निगरानी क्षमता सुनिश्चित हो।

    उन्होंने कहा कि इस योजना के कानून में एक टिकाऊ और जवाबदेह वित्तीय मॉडल का प्रावधान किया गया है। पहले श्रम बजट की कोई तय सीमा नहीं होती थी। अब उसकी जगह हर साल के लिए एक स्पष्ट और तय बजट निर्धारित किया गया है। लोगों की मांग के अनुसार काम देने की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि कुल आवंटन में वृद्धि की गई है, जिससे राज्यों को हाल के मनरेगा औसत की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वीबी जी राम जी योजना के तहत दो लाभार्थियों को ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड का वितरण किया। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को विभिन्न बैंकों के माध्यम से क्रेडिट लिंकेज राशि 3.31 करोड़ रुपये के चेक एवं राजस्थान महिला निधि की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत एसएचजी दीदियों को 1.16 करोड़ रुपये के ऋण चेक वितरित किए। उन्होंने समर्थ सखी ऋण योजना के तहत सीएलएफ कल्स्टर मैनेजर एवं बैंक मित्रों को स्कूटी प्रदान की। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नवीन आवासों की स्वीकृति तथा नवनिर्मित मकानों की चाबियां लाभार्थियों को सौंपी। इससे पहले उन्होंने राजीविका स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प उत्पादों के स्टॉल्स का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने लगभग 424 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्‍यास किया।

    इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम, देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष ओमप्रकाश भड़ाना, विधायक विरेन्द्र सिंह कानावत, शत्रुघन गौतम, शंकर सिंह रावत, रामस्वरूप लाम्बा, शासन सचिव ग्रामीण विकास कृष्ण कुणाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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