
नई दिल्ली । कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल (Congress General Secretary KC Venugopal) ने कहा कि लोकतंत्र को कार्यपालिका की ज्यादतियों से बचाना (To protect Democracy from excesses of Executive) न्यायपालिका की जिम्मेदारी है (It is Judiciary’s Responsibility) ।
देश की चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि 28 जून 2026 को 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को एक संयुक्त पत्र लिखा था। अब पारदर्शिता के हित में इस पत्र को सार्वजनिक किया गया है। केसी वेणुगोपाल ने पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दौर में देश की चुनावी लोकतांत्रिक व्यवस्था सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि पत्र में एसआईआर प्रक्रिया, चुनाव आयोग की पक्षपातपूर्ण भूमिका और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों पर चिंता जताई गई है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कार्यपालिका की ज्यादतियों से बचाना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है, खासकर तब जब विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि देश में चुनाव न केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष हों, बल्कि जनता को भी ऐसा महसूस हो। उनके अनुसार, यदि ऐसा नहीं होता है तो करोड़ों मतदाताओं के साथ अन्याय लगातार जारी रहेगा।
पत्र में बिहार और पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई। आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट गए, जिससे गरीब, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और प्रवासी मजदूर जैसे वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती, अधिकारियों के तबादलों और चुनावी प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए गए।
28 जून को लिखे संयुक्त पत्र में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने दिल्ली, हरियाणा, और महाराष्ट्र के चुनावों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आगामी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को स्थगित करने, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा कराने, और आवश्यकता पड़ने पर बैलेट पेपर प्रणाली पर विचार करने की मांग की। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए, उन्होंने न्यायपालिका से लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
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