
नई दिल्ली: भारत की बड़ी कंपनियां तेजी से डिजिटल हो रही हैं, लेकिन उनकी ईमेल सुरक्षा अब भी बड़ी चिंता बनी हुई है. अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी कंपनी प्रूफप्वाइंट की नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि फॉर्च्यून 100 इंडिया की 41 प्रतिशत कंपनियां अब भी फिशिंग और ईमेल इंपर्सनेशन जैसे साइबर हमलों के खतरे में हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने अभी तक ईमेल सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तर लागू नहीं किया है. ऐसे में साइबर ठग कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी ईमेल भेज सकते हैं और लोगों या कर्मचारियों को निशाना बना सकते हैं. यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब देश में साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और ऑनलाइन ठगी से हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ईमेल सिक्योरिटी में यह कमी कितनी बड़ी चिंता है और कंपनियों को इससे बचने के लिए क्या करना होगा?
41 प्रतिशत कंपनियों में ईमेल सिक्योरिटी की कमी
ET की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी कंपनी प्रूफप्वाइंट ने जून 2026 में फॉर्च्यून 100 इंडिया 2025 की कंपनियों का अध्ययन किया. इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, विप्रो और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं. स्टडी का मकसद यह देखना था कि कंपनियां डीमार्क यानी डोमेन बेस्ड मैसेज ऑथेंटिकेशन, रिपोर्टिंग एंड कनफोरमेंस जैसे ईमेल सुरक्षा मानक का कितना इस्तेमाल कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 41 प्रतिशत कंपनियों ने अभी तक ईमेल सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तर लागू नहीं किया है, जिससे उनके नाम पर फर्जी ईमेल भेजे जाने और फिशिंग हमलों का खतरा बना हुआ है.
डीमार्क क्यों जरूरी है?
रिपोर्ट के अनुसार, डीमार्क यह जांचता है कि किसी कंपनी के नाम से भेजा गया ईमेल असली है या नहीं. इसके आधार पर संदिग्ध ईमेल की निगरानी की जा सकती है, उसे स्पैम में भेजा जा सकता है या पूरी तरह ब्लॉक किया जा सकता है. ET की रिपोर्ट के अनसुार, प्रूफप्वाइंट के इंडिया कंट्री मैनेजर बिक्रमदीप सिंह के कहा कि कई कंपनियां अभी बदलाव के दौर में हैं, क्योंकि पूरी सुरक्षा लागू करने के लिए सभी वैध ईमेल सोर्स की पहचान करनी होती है. हालांकि साइबर अपराधी इसी तरह की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 97 प्रतिशत कंपनियों ने किसी न किसी स्तर पर ईमेल ऑथेंटिकेशन लागू किया है, लेकिन केवल 59 प्रतिशत कंपनियां सबसे मजबूत “रिजेक्ट” पॉलिसी का इस्तेमाल कर रही हैं.
साइबर अपराध तेजी से बढ़े, एआई भी बना नई चुनौती
रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2025 में साइबर अपराध के मामलों में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. फिशिंग और पहचान चोरी जैसे हमलों के कारण भारतीयों को 2025 में करीब 22,495 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. बिक्रमदीप सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब साइबर हमलों का दायरा और बढ़ा रहा है. एआई की मदद से हमलावर तेजी से फिशिंग कैंपेन चला सकते हैं और ज्यादा भरोसेमंद दिखने वाले फर्जी ईमेल तैयार कर सकते हैं. प्रूफप्वाइंट ने सलाह दी है कि कंपनियां मजबूत ईमेल ऑथेंटिकेशन अपनाएं, संदिग्ध ईमेल को सावधानी से जांचें और पासकी जैसे फिशिंग रेजिस्टेंट मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें.
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