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संजय दत्त की सजा वाले दिन कोर्ट में क्या हुआ था? उज्ज्वल निकम ने खोले कई राज, बोले- फैसला सुनते ही पूरी तरह टूट गए थे अभिनेता

July 14, 2026

नई दिल्ली । अभिनेता संजय दत्त (Sanjay Dutt) से जुड़े चर्चित आर्म्स एक्ट (Arms Act) मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस बार इसकी वजह वर्षों पुराने मुकदमे से जुड़ा वह घटनाक्रम है, जिसे विशेष सरकारी वकील रहे उज्ज्वल निकम (Ujjwal Nikam) ने हालिया बातचीत में साझा किया। उन्होंने अदालत (Court) में फैसला सुनाए जाने के दौरान के उन पलों को याद करते हुए बताया कि संजय दत्त उस समय बेहद डरे हुए थे और उनके चेहरे पर साफ घबराहट दिखाई दे रही थी। मुकदमे (Trial) से जुड़े इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उस मामले की यादें ताजा कर दी हैं।

निकम के अनुसार, अदालत में फैसला सुनाए जाने का दिन बेहद संवेदनशील था। संजय दत्त उस समय जमानत पर बाहर थे, लेकिन अदालत ने दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें तत्काल हिरासत में लेने का आदेश दिया। यह फैसला सुनते ही अभिनेता की मानसिक स्थिति पूरी तरह बदल गई और वह काफी भावुक हो गए। निकम ने बताया कि अदालत का माहौल गंभीर था और सभी की नजरें उसी मामले पर टिकी हुई थीं।

उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अदालत से आर्म्स एक्ट के तहत सख्त सजा की मांग की थी। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने यह दलील दी थी कि यह संजय दत्त का पहला अपराध था और उन्हें राहत दी जानी चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाया। निकम का कहना है कि उन्होंने कानून के प्रावधानों के आधार पर अपना पक्ष रखा और अदालत ने उसी अनुरूप फैसला दिया।

बातचीत के दौरान निकम ने यह भी बताया कि संजय दत्त लगातार अपनी बेगुनाही की बात दोहरा रहे थे। उनका कहना था कि उन्होंने जानबूझकर कोई गलत काम नहीं किया। इसके बावजूद अदालत के निर्णय के बाद वह बेहद निराश और असहज दिखाई दे रहे थे। निकम के अनुसार, उस समय उन्होंने संजय दत्त को संयम बनाए रखने की सलाह भी दी थी, क्योंकि अदालत परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग और मीडिया मौजूद थे।

यह मामला वर्ष 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोटों की जांच के दौरान सामने आया था। जांच में संजय दत्त के पास अवैध हथियार मिलने का मामला दर्ज हुआ। बाद में अदालत ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से राहत देते हुए केवल अवैध हथियार रखने के मामले में दोषी ठहराया। इसी आधार पर उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत सजा सुनाई गई थी।

बाद के वर्षों में यह मामला देश की सबसे चर्चित कानूनी प्रक्रियाओं में शामिल रहा। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले की सुनवाई करते हुए सजा की अवधि में संशोधन किया था। संजय दत्त ने निर्धारित अवधि पूरी करने के बाद अपनी सजा पूरी की और उसके बाद फिल्मों में वापसी की। हालांकि यह मामला आज भी उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित अध्यायों में गिना जाता है।


  • उज्ज्वल निकम ने यह भी कहा कि अदालत में उनकी भूमिका केवल कानून के अनुसार अपना पक्ष रखना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना था। वर्षों बाद सामने आए उनके इन बयानों ने एक बार फिर उस बहुचर्चित मुकदमे और उससे जुड़े भावनात्मक क्षणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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