
नई दिल्ली । वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों (Northeast Delhi Riots) के दौरान आईबी अधिकारी (IB Officer) अंकित शर्मा (Ankit Sharma) की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में अदालत (Court) द्वारा पांच आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद पीड़ित परिवार की वर्षों पुरानी पीड़ा एक बार फिर सामने आ गई है। परिवार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में आगे बढ़ना राहत का विषय जरूर है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द आज भी पहले जैसा ही है और उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।
अदालत के फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिजनों ने कहा कि पिछले छह वर्षों में उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। घटना के बाद सुरक्षा और मानसिक आघात के कारण उन्हें अपना पैतृक घर छोड़ना पड़ा। परिवार अब दूसरे स्थान पर रह रहा है, लेकिन पुराने इलाके से जुड़ी यादें आज भी उन्हें भावुक कर देती हैं। उनका कहना है कि उस घटना ने पूरे परिवार के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है।
अंकित शर्मा की हत्या फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हुई थी। आरोप है कि वह घर से बाहर निकलने के बाद भीड़ के बीच फंस गए थे, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। अगले दिन उनका शव बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और मामले की जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
हाल ही में अदालत ने इस मामले में पांच आरोपियों को दोषी करार दिया। फैसले के बाद परिवार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि न्यायिक प्रक्रिया आगे भी निष्पक्ष रूप से पूरी होगी और दोषियों को कानून के अनुसार अधिकतम सजा मिलेगी। परिवार का मानना है कि कठोर दंड ही इस तरह के अपराधों के प्रति सख्त संदेश देगा और पीड़ितों के न्याय के विश्वास को मजबूत करेगा।
अंकित शर्मा के बड़े भाई ने कहा कि परिवार ने पिछले कई वर्षों में लगातार मानसिक और भावनात्मक संघर्ष का सामना किया है। उन्होंने बताया कि माता-पिता आज भी उस घटना को याद कर भावुक हो जाते हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि हर सुनवाई और हर नए घटनाक्रम के साथ पुरानी यादें फिर ताजा हो जाती हैं।
परिवार ने यह भी कहा कि अंकित सभी लोगों के साथ सामान्य और सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखते थे। उनके अनुसार, वह अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित अधिकारी थे और समाज में सभी के साथ समान व्यवहार करने में विश्वास रखते थे। परिवार का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि एक होनहार युवा अधिकारी का जीवन हिंसा की भेंट चढ़ गया।
इस मामले का फैसला ऐसे समय आया है जब लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अपने महत्वपूर्ण चरण में पहुंची है। अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बाद अब सभी की नजरें सजा के निर्धारण पर टिकी हैं। परिवार ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे चाहते हैं कि कानून के अनुसार उचित और कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए।
अंकित शर्मा हत्याकांड आज भी देश के चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है। अदालत के ताजा फैसले ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने से उन्हें न्याय की उम्मीद अवश्य मिली है, लेकिन बेटे की कमी और उस दर्द को समय भी कम नहीं कर पाया है।
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