
गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के धुंगियामुडा गांव से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. यहां 50 साल की हीरा बाई नेताम को गंभीर बीमारी और सामाजिक अंधविश्वास के कारण गांव से बाहर एक झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर कर दिया गया. महिला पिछले कई सालों से गंभीर बीमारी से जूझ रही थी. उसके हाथ और पैर में गहरे घाव हो गए थे, जिनमें कीड़े पड़ चुके थे. असहनीय दर्द के बावजूद वह हर आने-जाने वाले से भीख मांगती थी.
परिजनों के अनुसार महिला का वर्षों तक इलाज कराया गया, लेकिन बीमारी में सुधार नहीं हुआ. सामाजिक दबाव और घर में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण परिवार ने 2 जुलाई से उसे गांव के बाहर अपने खेत में बनी झोपड़ी में रखना शुरू कर दिया. परिवार के सदस्य केवल दिन में दो बार भोजन पहुंचाते थे और बाकी समय महिला अकेले दर्द से कराहती रहती थी.
पीड़िता के पति नरसिंह नेताम का कहना है कि वह पिछले 20 वर्षों से पत्नी की सेवा कर रहे हैं, लेकिन घर में बाथरूम जैसी मूलभूत सुविधा नहीं होने और गांव वालों के दबाव के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा. वहीं बेटे डिगनेश्वर नेताम ने बताया कि गांव और समाज के लोगों ने महिला को छूत की बीमारी से ग्रसित बताते हुए गांव से बाहर रखने की बात कही थी. ऐसा नहीं करने पर परिवार को सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी गई थी.
मामले की जानकारी जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप को इंस्टाग्राम के माध्यम से मिली. सूचना मिलते ही उन्होंने देवभोग के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू से संपर्क किया और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे. परिजनों को समझाइश देने के बाद महिला को तत्काल देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है.डॉक्टरों के मुताबिक महिला के पुराने घाव में गैंगरीन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि यह कोई छूत की बीमारी नहीं है. बेहतर इलाज के लिए उसे रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल रेफर करने की तैयारी की जा रही है.
इस घटना ने स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सोच पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजन वर्षों तक निजी अस्पतालों में इलाज कराने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं का लाभ क्यों नहीं लिया, यह भी जांच का विषय बना हुआ है. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग महिला के बेहतर उपचार में जुटा है, जबकि यह मामला अंधविश्वास, सामाजिक बहिष्कार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी की गंभीर तस्वीर सामने लाता है.
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